117 12.2.1938 चातुर्वर्ण्य के कारण हिन्दुस्तान की अवनति और पतन हुआ है - सटाणा - Page 99

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जुगतें पहले भले अपने फायदे के लिए लड़ाई हों, आखिर वे राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हुई हैं इसमें कोई शक नहीं। अस्पृश्य माने गए समाज को आज तक जो अपार जुल्म और बदसलुकियां सहनी पड़ी हैं उसकी जड़ें इसी में हैं। अस्पृश्य माने गए समाज के पुरखों के हाथों में अगर शस्त्र होता तो उसके बाप-दादों ने दो हजार साल अस्पृश्यता का और सभी अन्य तरह का जुल्म जो उनके हिस्से आया वह क्या चुपचाप सहा होता? चातुर्वर्ण की दुष्ट सीख के कारण बहुजन समाज को शस्त्र और विद्या की बूटियां नहीं दी गईं। इस कारण इस देश का क्या हाल हुआ है? इस प्रांत में किसी समय क्षत्रियों का राज था। क्षत्रियों के पतन के बाद पेशवा का उदय हुआ। पेशवा के अस्त के बाद अंग्रेजों का राज शुरू हुआ। किसी समय राज करने वाले क्षत्रिय आज कहां हैं? जिन क्षत्रियों को राज चलाना चाहिए उन्हें आप सिर पर लाल पगड़ी बांधे और गले में पट्टी पहन कर चपरासियों के काम करते हुए दिखाई देंगे।

वेदाध्ययन कर ब्राह्मण पढ़ें और पढ़ाएं, क्षत्रिय लड़ाई करें, वैश्य व्यापार-व्यवसाय करें, शूद्र इन तीनों वर्गों की सेवा करें यह सब अब बदल रहा है। अब पहली ही बार हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र प्रणाली शुरू हुई है। ऐसे अवसर पर राष्ट्रहित की साधना करते हुए हिन्दुस्तान को संपूर्ण स्वतंत्रता दिलाने का संघर्ष जारी है। यह संघर्ष जिस काँग्रेस ने छेड़ा है वह भले सीना ठोक कर अपने को बहुसंख्यक गरीब किसानों, मजदूरों की रखवाली और कल्याणकर्त्ता बताए उनकी इस घोषणा से बदलने के लिए यह प्रजा भोली नहीं है। पूजा के हित के लिए काँग्रेस ने जिन सात राज्यों में सत्ता ग्रहण की उन प्रांतों के निरीक्षण से आपको क्या पता चलेगा? मुम्बई विधिमंडल की 11 में से 6 जगहें ब्राह्मणों ने हासिल की हैं। मद्रास और बिहार प्रांत के मंत्री मंडलों में 50 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। यही बात काँग्रेस चालित अन्य प्रांतों का भी है। सो, संक्षेप में अगर बताना हो तो बहुसंख्यक गरीब किसान और मजदूरों के नाम पर काँग्रेस ब्राह्मणों का भूत हमारी गर्दन पर लादना चाहती हो तो हम सबको समय रहते सावधान होना जरूरी है।

गैर-ब्राह्मण सुशिक्षितों में से किसी ने कुछ समय तक सत्यशोधक नामक एक पंथ की स्थापना की। इस पंथ का कुछ नाम हो इससे पहले ही उसके कार्यकर्त्ता हाथ धोकर काँग्रेस के पीछे पड़े हैं। लगता है वे अपने होश गंवा बैठे हैं। महात्मा गांधी की राजनीति से उनके जमाने में समूची राजनीतिक सत्ता अगर ब्राह्मणों के हाथ हाने वाली हो तो ऐसी राजनीति को आग लगानी चाहिए। राजनीति की गाड़ी का नियंत्रण महात्मा गांधी अगर सेठों-ब्राह्मणों के हाथ देने वाले हों और ब्राह्मणों के पिचाश को फिर से जीवित करने वाले हों तो उन ब्राह्मणों का खात्मा हम सभी को ही करना होगा। यह केवल मेरा काम नहीं है, यह बहुसंख्यक सभी किसानों, मजदूरों और मराठों का है। इन सभी को संगठित कर राजनीति चलाई जाए तो विधिमंडल की हमारी 11 में से 11 जगहों पर वे