प्रांतीय स्वायत्तता
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बांटा जाता है, यथा कनाडा, आस्ट्रेलिया और अमरीका में। भारत के संविधान में पूर्व स्वीकृति संबंधी प्रावधानों ने अपना स्थान दो गलत धारणाओं के कारण बना लिया है। एक यह है कि पूर्णतः कामों की सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है। इस धारणा का कोई ठोस आधार नहीं दीख पड़ता, क्योंकि कनाडा का संविधान निश्चय ही इन कामों को दो अलग-अलग वर्गों में बांटता है, यथा (1) वे वर्ग जो पूर्णतः केन्द्र सरकार के हैं, और (2) वे वर्ग, जिनका संबंध पूर्णतः प्रांतीय सरकारों से है। दोनों सरकारें अपने - अपने क्षेत्रों में पूर्णतः स्वायत हैं। दूसरी धारणा है कि उन कामों के निपटारे के लिए जिन्हें पूरी तरह प्रांतीय नहीं कहा जा सकता, केवल यह रास्ता है कि उनके लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्वानुमति लेनी होगी और केन्द्र को बाद में वीटो का अधिकार भी होगा। यह भी मुझे गलत धारणा लगती है। आस्ट्रेलिया और अमरीका का संविधान इसके उदाहरण हैं, जहां संविधानों ने कनाडा की तरह कार्यों के दो पूर्ण तथा स्पष्ट विभाजन नहीं किए हैं। आस्ट्रेलिया के संविधान में कार्यों और अधिकारों के विभाजन की जो योजना अपनाई गई है, उसके अनुसार वहां कुछ ऐसे मामले हैं, जिनके बारे में केन्द्र की सरकार को और अधिकार मिले हुए हैं। कुछ अन्य मामलों में केन्द्र की सरकार के अधिकार राज्य सरकारों के अधिकारों के समवर्ती हैं, लेकिन समवर्ती विधान के मामलों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है : (1) वह जिसमें राज्य के अपने निजी अधिकारों के प्रयोग का उल्लंघन मात्र करके राष्ट्रकुल संसद का अधिकार सर्वोच्च विधान के रूप में चलता है, और (2) वह जिसमें राष्ट्र - कुल को कोई सर्वोच्च अधिकार प्राप्त नहीं है। अमरीका में सरकार के अधिकारों की स्थिति इस प्रकार हैं : (1) अधिकार जो केवल केन्द्रीय सरकार को प्राप्त हैं, (2) अधिकार जो केवल राज्य सरकारों को प्राप्त हैं, (3) अधिकार जो केन्द्र की सरकार और राज्यों, दोनों को प्राप्त हैं, (4) अधिकार जो केन्द्र की सरकार को प्राप्त नहीं है, और (5) अधिकार जो राज्य सरकारों को प्राप्त नहीं हैं। इस तरह आस्ट्रेलिया और अमरीका दोनों संविधानों में यह मान्यता है कि ऐसे कार्य हो सकते है जिनके बारे में नहीं कहा जा सकता कि वे पूर्णतः किसी एक के हैं। परन्तु उनमें से किसी ने भी यह योजना नहीं अपनाई है कि इन कार्यों को एक सरकार को सौंपा जाए और उस पर शर्त लगा दी जाए कि उसे दूसरी सरकार की पूर्व स्वीकृति लेनी होगी और दूसरी सरकार चाहे तो बाद में वीटो का इस्तेमाल भी कर सकती है। मैं सिफारिश करता हूँ कि कार्यों और अधिकारों के विभाजन की कनाडा जैसी योजना को आजमाया जाए और यदि वह असफल रहे तो आस्ट्रेलिया या अमरीका में प्रचलित योजना अपनाई जाए। परन्तु किसी भी हालत में पूर्व स्वीकृति और पश्चात्वर्ती वीटो का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।
- प्रांतीय नियंत्रण के लिए हस्तांतरित विषयों पर पर्यवेक्षण के अधिकार जिस उपबंध के द्वारा केन्द्रीय सरकार को दिए गए, उसकी व्यवस्था का आंशिक कारण यह