4. प्रांतीय स्वायत्तता - Page 103

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

है कि केन्द्र तथा राज्यों के बीच विषयों का स्पष्ट आवंटन नहीं है। उसका आंशिक कारण यह है कि प्रांतीय विषयों के प्रशासन के लिए केन्द्रीय सरकार के दायित्व के बारे में एक गलत धारणा बना ली गई है। पर्यवेक्षण के अधिकार का औचित्य इस आधार पर ठहराया जाता है कि कुछ विषय केन्द्रीय सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि कनाडा, आस्ट्रेलिया अथवा अमरीका की पद्धति के अनुसार विषयों का समुचित आवंटन कर दिया जाए तो यह तर्क टिकेगा नहीं। पर्यवेक्षण के अधिकारों के औचित्य के बारे में दूसरा दृष्टिकोण यह है कि भारत की शांति, व्यवस्था और उत्तम प्रशासन का दायित्व समग्रतः भारत सरकार का ही होना चाहिए। वह अपने दायित्वों का निर्वाह करके, इसके लिए उसे पर्यवेक्षण का अधिकार मिलना ही चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि कार्यों के विभाजन के साथ - साथ दायित्वों का भी विभाजन होना चाहिए। यदि इन दायित्वों का भी विभाजन कर दिया जाए और केन्द्रीय सरकार का दायित्व केवल उन्हीं विषयों तक सीमित रहे, जो उसे सौंपे जाएं तो प्रांतीय सरकारों के पर्यवेक्षण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। मैं सुझाव देता हूँ कि भारत सरकार अधिनियम के जो खंड केन्द्रीय सरकार के दायित्वों को परिभाषित करते हैं, उनमें तद्नुसार संशोधन कर दिया जाए।

  1. जहां मैं देखना चाहता हूँ कि प्रांतों की पूर्ण स्वायत्तता हो वहां मैं किसी भी ऐसे परिवर्तन के विरुद्ध हूँ, जिससे किसी भी तरह केन्द्रीय सरकार कमजोर होती हो या जिससे हमारा राष्ट्रीय स्वरूप नष्ट होता हो या लोगों की नजरों में उसका अस्तित्व संदिग्ध बने। इस दृष्टिकोण के अनुसार मैं नहीं चाहता कि केन्द्रीय सरकार को ऐसा संघ बना दिया जाए, जिसमें अनेक सरकारों का समावेश हो ताकि वे कतिपय प्रयोजनों के लिए आबद्ध होकर एक निकाय बना सकें। ऐसी व्यवस्था का प्रभाव स्पष्ट है। यह संघ केवल राज्यों के जमघट के रूप में बना रहेगा और जैसे ही वे प्रांत अलग - अलग होने का फैसला करेंगे, वह संघ टूट जाएगा। ऐसी केन्द्रीय सरकार केवल तभी तक चल सकती है, जब तक उसमें शामिल सरकारें चाहेंगी कि यह संघ चलता रहे। यह संघ सरकारों का परिसंघ होगा और उसका वास्ता केवल सरकारों से होगा। नागरिकों से इसका कोई लेना - देना नहीं होगा। ऐसा कोई अधिकार नहीं होगा कि वह व्यक्ति पर कर लगा सके, उसके हितों पर निर्णय दे सके और उसके लिए कानून बना सके। निश्चय ही ऐसी केन्द्रीय सरकार दुर्बलतम सरकार होगी। केन्द्रीय सरकार की स्थिति के बारे में जो मेरी अवधारणा है, उसके अनुसार मैं ऐसे संबंधों को मानने के लिए तैयार नहीं जैसे कि अमरीका के संविधान में पाए जाते हैं, जिनमें केन्द्रीय सरकार एक राष्ट्रकुल और साथ ही राष्ट्रकुलों का एक संघ है। यह सत्य है कि इसके अधीन केन्द्रीय सरकार अपनी अदालतों और अधिकारियों के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के बारे में तुरंत कार्यवाही कर सकती है। परन्तु यह भी उतना ही सत्य है अमरीका की केन्द्रीय सरकार राज्यों की सृष्टि है। राज्यों ने ही उसे अस्तित्व प्रदान किया है।