प्रांतीय स्वायत्तता
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अतः उनके बल पर ही वह टिकेगी और उनके साथ ही वह गिरेगी। राज्यों ने जिन अधिकारों का जान - बूझकर समर्पण नहीं किया है, वे सभी उनके पास हैं। केन्द्रीय सरकार के पास उनके अलावा और कोई अधिकार नहीं है, जो कानूनी तौर पर उसे मिले हैं। ऐसी केन्द्रीय सरकार कसी संघ की किसी केन्द्रीय सरकार से कितनी भी सुदृढ़ क्यों न हो, वह मेरे विचार में भारत की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त मजबूत सरकार नहीं हो सकती। मेरा विचार है कि राष्ट्रीय सरकार की ऐसी स्थिति हो कि वह प्रांतीय सरकारों के बल पर टिकी हुई न लगे। दरअसल उनकी स्थिति इतनी स्वतंत्र हो कि चाहे सभी प्रांतीय सरकारें टूट जाएं अथवा नितांत विभिन्न संस्थाओं के रूप में बदल जाएं, फिर भी वह बनी रहे। केन्द्रीय सरकार को यह अधिकार भी हो कि वह किसी प्रांत का प्रशासन तब भी संभाल ले जब कोई प्रांतीय सरकार विद्रोह या किसी और कारण से काम बंद कर दे। इसलिए प्रश्न के इस पहलू के बारे में मैं निम्नलिखित सिफारिशें करता हूँ कि :
(1) सभी अवशिष्ट अधिकार केन्द्रीय सरकार के पास ही हों।
(2) ऐसे विशिष्ट अधिकार केन्द्र की सरकार को दिए जाएं कि वह किसी राज्य की
उदण्डता और विद्रोह को दबा सके, जिससे देश के हितों पर आंच आती हो।
(3) यदि प्रांतीय सरकार काम करना बंद कर दे, तो उसे दिए गए सभी अधिकार
पुनः केन्द्रीय सरकार की झोली में ही आ जाएंगे; और
(4) केन्द्रीय विधायिका का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से हो।
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प्रांतीय सरकार और सम्राट का संबंध
- जहां तक प्रांतीय स्वायत्तता का प्रश्न है, केवल इतना पर्याप्त नहीं है कि प्रांतीय सरकार और केन्द्रीय सरकार के बीच समुचित संबंधों की व्यवस्था कर दी जाए। यह भी आवश्यक है कि प्रांतीय सरकारों का दर्जा परिभाषित किया जाए। मुख्यतः उनके विदेश - संबंधों के बारे में इसका व्यावहारिक महत्व है। यह निर्विवाद है कि प्रांतों का कोई अंतर्राष्ट्रीय दर्जा नहीं हो सकता। परन्तु ब्रिटिश सरकार (होम गवर्नमेंट) के साथ उनके संबंधों का प्रश्न अलग बात है और उसका आसानी से निपटारा संभव नहीं। यह स्पष्ट है कि प्रांतीय सरकारों और ब्रिटिश सरकार के बीच संबंध का जो भी रूप हो, वह देश के संवैधानिक कानून के अनुसार होना ही चाहिए। किसी प्रांत को कितनी राजनीतिक स्वतंत्रता दी जाए, उसी के अनुसार ही समस्या के प्रति दृष्टिकोण निर्धारित किया जाए। क्या प्रांतों को स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व से इतना वंचित रखा जाए कि उन्हें केवल आंतरिक विभाजन ही माना जाए और उनकी तुलना स्थायी सरकार