परिच्छेद
सिफारिशों का सारांश
| fl | lQkfj'kk | Col3 | Col4 | Col5 | Col6 |
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| Col1 | Col2 | Col3 | Col4 | Col5 |
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भाग 1
कर्नाटक और सिंध को बंबई प्रेसिडेंसी से अलग न किया जाए। भाग 2
अध्याय 1 - प्रांतीय कार्यपालिका को इस परन्तुक के अधीन पूर्ण दायित्व दिया जाए कि यदि विधायिका के सदस्य इसे आरक्षित विषय बनाने का संकल्प करें, तो उनके संकल्प को कार्यरूप दिया ही जाएगा।
अध्याय 2 - किसी भी दशा में कार्यपालिका को अपरिहार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। कार्यपालिका में कोई सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए। मंत्रियों को अवैध कार्यों के लिए अदालत के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। संविधान में मंत्रियों पर महाभियोग चलाने की व्यवस्था होनी चाहिए। कार्यपालिका का संयुक्त दायित्व होना चाहिए। कार्यपालिका की अध्यक्षता प्रधान मंत्री करे, गवर्नर नहीं।
अध्याय 3 - गवर्नर की हैसियत संवैधानिक अध्यक्ष की होनी चाहिए। उसके पास आपात अधिकार नहीं होने चाहिएं। भाग 3
अध्याय 1 - मताधिकार वयस्कता के आधार पर होना चाहिए।
अध्याय 2 - पूरी विधायिका निर्वाचित होनी चाहिए। यूरोपीय को छोड़कर शेष सबके लिए वर्गीय या सांप्रदायिक निर्वाचक - मंडल समाप्त किए जाने चाहिएं। यदि मताधिकार का आधार सीमित बना रहे, तो केवल मुसलमानों, दलितों, आंग्ल - भारतीयों और गैर - ब्राह्मणों के लिए स्थान आरक्षित किए जाने चाहिएं।