6. सिफारिशों का सारांश - Page 124

परिशिष्ट

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कला और विज्ञान का रस घोलने के लिए कितनी आवश्यकता है और कितनी सुविधा प्राप्त है। हम वैसी ही अन्य सामान्य बातें सुनते हैं, जो इस विषय में भ्रामक धारणाओं से परिपूर्ण हैं। एक दर्शक भी शायद यह सोचने के लिए लालायित हो सकता है कि शिक्षा - बोर्डों के हाथों में तो राज्य के समूचे संसाधन हैं, कैसा भ्रम है। स्थिति यह है कि उनके पास तो दाल में नमक के बराबर अति अल्प अंश है। वह तो इंग्लैंड के एक अकेले प्रतिष्ठान के लिए नियत राशि से भी कम है। शिक्षा का कोई साधन है ही नहीं

पैरा 14 - इन तथ्यों से यह स्पष्ट परिणाम निकलता है कि यदि 175 वर्नाकुलर स्कूलों को संगठन की समुचित दशा में रखने और 10,730 बच्चों की ठोस प्राथमिक शिक्षा देने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो देश के ‘जन - जन’ को, 14 करोड़ लोगों को, बंबई प्रेसिडेंसी के 900,000 बच्चों को शिक्षित करने का समूचा प्रश्न ही निरर्थक हो जाएगा। उद्देश्य ऐसा नहीं है, जिसे सरकार पूरा या लगभग पूरा कर ले। शिक्षा बोर्डों की अनसुनी उदारता की काल्पनिक अटकलों में फंसकर सीमित व्यावहारिक कर्मक्षेत्र से विचलित नहीं होना चाहिए।

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सीमित साधनों से संचालन की श्रेष्ठ प्रणाली के बारे में निदेशकों के कोर्ट के

विचार

पैरा 15 - लगता है, माननीय कोर्ट ने सदा ही उस निष्कर्ष को ध्यान में रखा है, जो पिछले पैरा में स्पष्ट शब्दों में व्यक्त किया गया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि लोगों में सुधार के लिए उनके शैक्षिक प्रयास केवल बहुत छोटे पैमाने पर ही किए जा सकते हैं, उन्होंने यह जरूरी समझा है कि वे अपनी विभिन्न सरकारों को बताएँ कि सीमित साधनों से महानतम सफलताएँ वास्तव में कैसे प्राप्त की जा सकती हैं। हम इस विषय में मद्रास सरकार को भेजी गई उनकी निषेधाज्ञाओं को उद्धृत कर चुके हैं (पैरा 7) और उसी तिथि को उस सरकार को भेजे गए डिस्पैच में उसी आशय की भावना व्यक्त की गई है : “हमारी यह उत्कट इच्छा है कि हम भारत के मूल निवासियों के उच्च वर्ग को ऐसे साधन उपलब्ध कराएँ कि यूरोपीय विज्ञान की शिक्षा मिल सके और सभ्य यूरोप के साहित्य तक उनकी पहुँच हो सके। अवकाश के क्षणों तथा सहज प्रभाव से लैस वर्गों को जो स्वरूप प्रदान किया जा सके, वही अंततः समूचे जन - वर्ग का स्वरूप निर्धारित करेगा।” कौन हैं भारत के उच्च वर्ग ?

पैरा 16 - जब यह बताया जा रहा है कि भारत में आबादी के केवल छोटे से भाग को सरकारी शिक्षा की परिधि में लाया जा सकता है और जब माननीय कोर्ट ने वस्तुतः तय कर लिया है कि यह भाग ‘उच्च वर्ग’ का होना चाहिए, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उच्च वर्ग में कौन - कौन शामिल हैं। इसलिए यूरोपीय जिज्ञासु के लिए