दलित वर्ग की शिक्षा
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शिक्षा बोर्डों के हाथ में तो राज्य के समूचे संसाधन हैं, यह कैसा भ्रम है? स्थिति यह है कि उनके पास तो दाल में नमक के बराबर अति अल्प अंश है। वह तो इंग्लैंड के एक अकेले प्रतिष्ठान के लिए नियत राशि से भी कम है।
पैरा 9 - गत दस वर्षों के पिछले कुछ पैराओं में जो तर्क प्रस्तुत किए गए हैं, गत दस वर्षों के
दौरान शिक्षा संबंधी प्रमुख उनसे यह पता चलता है कि प्रेसिडेंसी में शिक्षा तथ्यों का सिंहावलोकन संबंधी प्रयासों के दौरान जो प्रमुख लक्षण दृष्टिगोचर दौरान शिक्षा संबंधी प्रमुख तथ्यों का सिंहावलोकन
आवश्यक है हुए हैं, उनका विश्लेषण और वास्तविक तथ्यों की आवश्यक है
सावधानी से पड़ताल करना उपयोगी होगा, यदि विश्वास पैदा करने के लिए पर्याप्त उद्यम किया जाए और निष्पक्षता बरती जाए तथा निराधार विवाद तथा सभी प्रकार की अटकलबाजियों को दूर करने के लिए दृढ़ निश्चय का परिचय दिया जाए। लगता है कि वर्तमान काल ऐसे सिंहावलोकन की विशेष अपेक्षा रखता है, क्योंकि 1850 में दूसरा दशक शुरू हो गया है और उसमें प्रेसिडेंसी के स्कूल एक सरकारी बोर्ड के पूर्ण नियंत्रण में आ गए हैं और यह स्पष्ट है कि चूंकि अब तक काफी सूचना इकट्ठी हो जानी चाहिए और वर्तमान सदस्यों में से अधिकतर उस काल के अधिकांश भाग में बोर्ड के सदस्य रहे हैं। अतः उन्हें आशा होगी कि अपने अनुभव का उल्लेख करके वे उन कतिपय अस्पष्ट पर अति दिलचस्प सवालों पर रोशनी डाल सकते हैं, जो निश्चय ही इस बोर्ड में उनके उत्तराधिकारियों के समक्ष समय - समय पर उठेंगे।
पैरा 10 - बंगाल और अब हम शिक्षा संबंधी उन प्रमुख तथ्यों का यथारूप बंगाल और
बंबई दोनों में स्व - स्फूर्त सूक्ष्म विवेचन करने का प्रयास करते हैं, जिन्होंने बंबई दोनों में स्व
स्फूर्त
समान प्रणाली हमारा ध्यान आकर्षित किया है और हमारा विचार समान प्रणाली
है कि जब उन तथ्यों को समुचित रूप से समझ लिया जाएगा, तो स्पष्ट रूप से दीख पड़ेगा कि भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में, जो अनेक विवादास्पद प्रश्न उठ खड़े हुए हैं, वे स्वयमेव सुलझते नजर आएंगे और अन्य प्रेसिडेंसियों तथा बंबई में सामान्यतः स्वयमेव एक ऐसी प्रणाली का विकास हो रहा है, जो देश की परिस्थितियों के नितांत अनुकूल है और जैसा कि स्व - स्फूर्त विकास दर्शाता है कि उसके सामान्य लक्षण नजर आ रहे हैं।
पैरा 11 - बंबई में अगले पृष्ठ पर दिए गए विवरण में उस काल का, बंबई में
शिक्षा संबंधी आंकड़े जब शिक्षा प्रतिष्ठान पहले-पहल 1840 में और अप्रैल 1850 शिक्षा संबंधी आंकड़े
में बोर्ड के नियंत्रण में आए, सरकारी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों तथा स्कूलों की संख्या का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। उससे पता चलता है कि उत्तरवर्ती काल में 4 अंग्रेजी तथा 83 वर्नाक्यूलर स्कूल जोड़े गए और छात्रों की संख्या में सामान्य वृद्धि शत प्रतिशत से भी अधिक हो गई। इस समय सरकारी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की कुल संख्या 12,712 है। उनका अनुपात इस प्रकार है :