ख. दलित जातियों की शिक्षा - Page 134

दलित वर्ग की शिक्षा

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पैरा 15 - सीमित साधनों लगता है माननीय कोर्ट ने सदा ही उस निष्कर्ष से संचालन की श्रेष्ठ प्रणाली को ध्यान में रखा है, जो पिछले पैरा में स्पष्ट शब्दों से संचालन की श्रेष्ठ प्रणाली

के बारे में निदेशकों के कोर्ट में व्यक्त किया गया है। इस बात को ध्यान में के बारे में निदेशकों के कोर्ट

के विचार रखते हुए कि लोगों में सुधार के लिए उनके के विचार

शैक्षिक प्रयास केवल बहुत छोटे पैमाने पर ही किए जा सकते हैं, उन्होंने यह जरूरी समझा है कि वे अपनी विभिन्न सरकारों को बताएं कि सीमित साधनों से महानतम सफलताएं वास्तव में कैसे प्राप्त की जा सकती हैं? हम इस विषय में मद्रास सरकार को भेजी गई उनकी निषेधाज्ञाओं को उद्धृत कर चुके हैं (पैरा 7) और उसी तिथि को उस सरकार को भेजे गए डिस्पैच में उसी आशय की भावना व्यक्त की गई है : ‘‘हमारी यह उत्कट इच्छा है कि हम भारत के मूल निवासियों के उच्च वर्ग को ऐसे साधन उपलब्ध कराएं कि यूरोपीय विज्ञान की शिक्षा मिल सके और सभ्य यूरोप के साहित्य तक उनकी पहुंच हो सके। अवकाश के क्षणों तथा सहज प्रभाव से लैस वर्गों को जो स्वरूप प्रदान किया जा सके, वही अंततः समूचे जन - वर्ग का स्वरूप निर्धारित करेगा।’’

पैरा 16 - कौन हैं भारत जब यह बताया जा रहा है कि भारत में आबादी कौन हैं भारत

के उच्च वर्ग? के केवल छोटे से भाग को सरकारी शिक्षा की परिधि के उच्च वर्ग?

में लाया जा सकता है और जब माननीय कोर्ट ने वस्तुतः तय कर लिया है कि यह भाग ‘उच्च वर्ग’ का होना चाहिए तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उच्च वर्ग में कौन - कौन शामिल है। इसलिए यूरोपीय जिज्ञासु के लिए यह नितांत जरूरी है कि वह यूरोप की सादृश्यताओं से अपने मन को मुक्त कर ले जो अक्सर स्वयं को अनजाने में चुपके - चुपके आंग्ल - भारतीय अटकलों की ओर ले जाती हैं। यूरोप की, विशेषतः इंग्लैंड की, परिस्थितियों ने शिष्टाचार, धन, राजनीतिक व सामाजिक प्रभाव के सुस्पष्ट आधार पर उच्च एवं निम्न वर्ग के बीच एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है। भारत में ऐसी कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है। यहां सभी निरंकुश शासकों की भांति राजा की इच्छा सर्वोपरि थी, वह चाहे तो रंक को राजा बना सकता था, पर ऐसी कोई रेखा न होने के कारण यहां आचरण में सदैव भारी समानता रही है। अंग्रेजी धारणा के अनुसार भिखारी केवल पशु वार्डों में रहने के लिए या मुहताजखानों में बेगार करने के लिए उपयुक्त हैं, भारत में उसका सम्मान होता है और ब्राह्मणीय (वैदिक) विचारधारा के अनुसार आदरणीय है। उसके अनुसार वह एक ऐसा उच्च प्राणी है, जिसने ज्ञान प्राप्ति और देवता की अखंड आराधना के लिए जीवन के सभी प्रकार के भोग तथा मोह को त्याग दिया है।

पैरा 17 - भारत के जो वर्ग अब भी भारत के प्रभावशाली और उच्च वर्ग समझे भारत के

उच्च वर्ग जाते हैं, उनकी श्रेणियां इस प्रकार हैं :