ख. दलित जातियों की शिक्षा - Page 136

दलित वर्ग की शिक्षा

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उनकी जैसी उच्च जातियां। लेकिन ब्राह्मण तथा ये उच्च जातियां अधिकांशतः अति दरिद्र हैं। भारत के अनेक भागों में तो ब्राह्मण ‘भिखारी’ का पर्याय बन गया है।

पैरा 20 - धनी वर्ग अतः हम देख सकते हैं कि 24 अप्रैल, 1850 के अपने पत्र फिलहाल उच्च शिक्षा का में माननीय न्यायमूर्ति की परिषद् ने, जो कठोर आदेश फिलहाल उच्च शिक्षा का

दिया समर्थन नहीं करेगा था, उसे लागू करना कितना निराशाजनक है। सरसरी तौर पर वह स्वयं में कितना सत्याभाषी और समुचित दीख पड़ता है। वस्तुतः उसका स्वयं बोर्ड ने बहुधा प्रयास किया है, अर्थात् उच्च शिक्षा को कठोरता से उस धनी वर्ग तक सीमित रखा जाए, जो उसका खर्च उठा सकता है और असाधारण बुद्धिमत्ता वाले नौजवानों तक भी। जब भी बोर्ड ने इस प्रकार के दृष्टिकोण को लागू करने का प्रयास किया है, तो सदैव उसका उत्तर यही मिला है कि धनी वर्ग उच्च शिक्षा के प्रति पूर्णतः उदासीन रहा है और गरीबों में से असाधारण बुद्धिमत्ता को खोजने का कोई मार्ग तभी निकल सकता है, जब स्कूली शिक्षा द्वारा उनके गुणों को परखा जाए और उनका विकास किया जाए। इसमें संदेह नहीं कि धनी वर्गों का एक अल्पांश अपनी रुचि दिखा रहा है और उसने उच्च शिक्षा के लाभों को स्वीकार किया है। वह वर्ग अधिकतर बंगाल में दीख पड़ता है, जहां सरकार ने अधिक लम्बे अर्से से शिक्षा का प्रसार किया है। बंबई में वह उतना नहीं दीख पड़ता। हमारे विचार में यह अनिवार्य है कि इस अनुभूति के साथ - साथ ऐसे वर्ग की संख्या बढ़ेगी ही कि उच्च उपलब्धियां विशिष्टता प्रदान करती हैं। उनके कारण सामाजिक समता के आधार पर यूरोपीयों से निकट संपर्क स्थापित होता है। लेकिन फिलहाल सामान्य प्रस्थापना के रूप में हम संतुष्ट हैं कि यूरोप की कला और विज्ञान संबंधी अकादमीय शिक्षा को भारत के प्रति संपन्न वर्गों के छात्रों अथवा पैसे पर आधारित नहीं किया जा सकता।

पैरा 21 - निम्न जातियों वर्षों के अनुभव के आधार पर हमने इन तथ्यों से निम्न जातियों

की शिक्षा के बारे में प्रश्न यह व्यावहारिक निष्कर्ष निकाला है कि उच्च जातियों के जो निर्धन बच्चे हमसे शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए एक अति चौड़ा द्वार

खोला जाना चाहिए। लेकिन पुनः यहां भी एक और दिमाग चाटने वाला प्रश्न उठता है और उसकी ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि गरीबों के बच्चों को बेरोकटोक सरकारी संस्थाओं में प्रवेश दिया जाता है, तो वह कौन सी बाधा है, जो ढेड़, महार आदि जैसी सभी हेय जातियों को इन संस्थाओं की चारदीवारी के भीतर भारी संख्या में आने से रोक सकती है।

पैरा 22 - हिन्दुओं के इसमें संदेह नहीं कि यदि इन दलितों का बंबई में सामाजिक पूर्वाग्रह कोई वर्ग बनाया जाए, तो बोर्ड की सेवा में रत पैरा 22 - हिन्दुओं के सामाजिक पूर्वाग्रह

प्रोफेसरों तथा मास्टरों के मार्गदर्शन में उन्हें समाज में किसी से भी बेहतर बुद्धिमत्ता वाले व्यक्तियों में परिणत किया जा सकता है। तब वे जो योग्यता प्राप्त करेंगे, उसके