दलित वर्ग की शिक्षा
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जाते हैं . . . काठियावाड़ में दलित जातियों के केवल तीन छात्र पढ़ रहे हैं। दक्षिणी डिवीजन में उनके लिए 72 विशेष स्कूल अथवा कक्षाएं चल रही हैं, जिन्हें अधिकांश अप्रशिक्षित अध्यापक चला रहे हैं।’’
इस असमान व्यवहार का जन्मदाता हंटर आयोग है। हंटर आयोग ने मुसलमानों का कितना पक्ष लिया, यह स्पष्ट हो जाएगा, यदि हम मुसलमानों के लिए इसके द्वारा की गई सिफारिशों की तुलना दलितों के हितों के संबंध में की गई उसकी सिफारिशों से करें। मुसलमानों के बारे में इस आयोग ने 17 सिफारिशें की थीं। उनमें से निम्नलिखित उल्लेखनीय हैं :
मुसलमानों में शिक्षा को दिया जाने वाला विशेष प्रोत्साहन स्थानीय नगरपालिका
और प्रान्तीय कोष पर वैध प्रभार माना जाए।
- मुसलमानों में उच्च अंग्रेजी शिक्षा को, चूंकि यह ऐसी शिक्षा है, जिसमें उसी समुदाय
को विशेष सहायता की जरूरत है, उदारतापूर्वक प्रोत्साहित किया जाए।
- जहां जरूरी हो, मुसलमानों के लिए विशेष क्रमबद्ध छात्रवृत्तियां आरंभ की
जाएं, जो (क) प्राथमिक स्कूलों और मिडिल स्कूलों में भी; (ख) मिडिल
स्कूलों और हाई स्कूलों में भी; (ग) दसवीं कक्षा और प्रथम कला परीक्षाओं के
परिणामों के आधार पर और कालिजों में भी दी जाएं।
- सरकारी कोष से चलाए जाने वाले स्कूलों की सभी कक्षाओं में निःशुल्क रखे
जाने वाले छात्रों का एक निश्चित अनुपात मुसलमान छात्रों के लिए स्पष्ट
रूप से आरक्षित किया जाए।
- जहां पर मुसलमानों के कल्याण के लिए शैक्षिक धर्मार्थ कोष हैं और वे सरकार
के प्रबंधन में हैं, वहां पर प्रत्येक धर्मार्थ खाते के कोष को केवल मुसलमानों
में शिक्षा के प्रसार पर खर्च किया जाए।
- जहां मुसलमान, निजी संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के प्रबंध के अंतर्गत कार्य कर
रहे हैं वहां सहायतानुदान प्रणाली के आधार पर अंग्रेजी की शिक्षा देने वाले
स्कूलों अथवा कालिजों को स्थापित करने के लिए उन्हें उदार सहायतानुदान
के रूप में प्रोत्साहन दिया जाए।
- जहां जरूरी हो, वहां मुसलमान शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नार्मल स्कूल
अथवा कक्षाएं खोली जाएं।
- मुसलमानों के प्राथमिक स्कूलों के निरीक्षण के लिए अब तक की अपेक्षा अधिक
मुसलमान निरीक्षक अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
- शिक्षित मुसलमानों और अन्य वर्गों को दिए जाने वाले संरक्षण के प्रश्न पर
स्थानीय सरकारों का ध्यान दिलाया जाए।