156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
प्रकार के आदेश देने की उच्चतर बुद्धिमत्ता होना, ये सब ऐसी तस्वीरें हैं, जो पढ़ने में तो बड़ी भली मालूम होती हैं, लेकिन ऐसी तस्वीरें तभी सार्थक होंगी, जब दलित वर्गों का कोई भी हिन्दू समाज के भले व्यक्तियों के अस्तित्व को न नकारे। दलित वर्गों में से कोई भी व्यक्ति यह आशंका नहीं करता कि एक भले हिन्दू के प्रशासन के अधीन महान और सार्वजनिक सुख प्राप्त नहीं हो सकेगा। लेकिन तथ्य यह है कि कानूनों और संस्थाओं को भले आदमियों के अनुकूल नहीं अपितु बुरे आदमियों के अनुकूल बनाया जाता है। इस दृष्टि से यह निरापद होगा कि संविधान के खंडों में गारंटी का समावेश करके आवश्यक संरक्षण प्रदान किया जाए, बजाए इसके कि उसे इस काल्पनिक आधार पर आरक्षित छोड़ दिया जाए कि अत्याचारी बहुमत में अल्पमत के प्रति सहानुभूति रखने वाले चन्द भले व्यक्ति हैं, दलित वर्गों के अलावा अन्य व्यक्ति ऐसी गारंटियों को अनावश्यक समझ सकते हैं, लेकिन दलित वर्गों की दृष्टि से यह रक्षा का एक अनिवार्य उपाय है। सुधारों के बारे मे दलित वर्गों के बीच इतनी घोर आशंका व्याप्त है कि प्रारम्भ से ही सुधारों के प्रति उनके मन में इतना तीव्र रोष था कि दलित वर्गों द्वारा श्री मोंटग्यू को दिए गए एक मानपत्र में उन्होंने कहाः ‘‘यदि इस दशा में ब्रिटिश हाथों से सत्ता तथाकथित सवर्ण हिन्दुओं के हाथों में सौंपने की कोई कोशिश की गई, तो ऐसी हर कोशिश का विरोध हम अपने रक्त की अंतिम बूंद तक करेंगे।’’ गारंटी की प्रणाली के अलावा और कोई चीज ऐसी आशंकाओं को निर्मूल नहीं कर सकती। सरकार आस्था पर टिकी होती है, तर्क पर नहीं। यदि नए संविधान के प्रति दलित वर्गों की कोई आस्था नहीं बन सकती, तो राजनीतिक सूझबूझ का तकाजा है कि यदि हो सके, तो यहाँ मांगी गई गारंटियों की रियायत से उस आस्था को खरीद लिया जाए। क
अनुलग्नक
मद संख्या 1
‘‘टाइम्स आफ इंडिया’’, 8 फरवरी, 1928 से)
अंत्यजों का उत्थान नहीं
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पिछले महीने बंबई के सनातनी रूढि़वादी अग्रवाल मारवाडि़यों के बीच स्थानीय नर नारायण मंदिर में महामहोपाध्याय पंडित अनन्त कृष्ण शास्त्री (प्रोफेसर, कलकत्ता विश्वविद्यालय) ने गत मास एक प्रवचन दिया, जिसे भारतीय समाज सुधार की तीव्र प्रगति के बारे में एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। उसे अवांछित विस्मरण से बचाया जाना चाहिए। प्रवचन का विषय था। ‘पतितों के उत्थान का मार्ग’ और अध्यक्षता बंबई के नए वैष्णव मंदिर के श्री जगदगुरु अनंताचार्य महाराज ने की थी। प्रवचन में वक्ता ने शास्त्रों से प्रमाण देकर सिद्ध किया कि आदि काल से विभिन्न जातियां चली आ रही हैं और वे अनन्त काल तक रहेंगी। उन्होंने कहा कि जो अत्ंयजों के उत्थान की बात करते हैं, वे गाल बजाते हैं। वास्तविकता यही है कि अत्ंयजों का इस दृष्टि से उत्थान