158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय मद संख्या 3
‘‘ईवनिंग न्यूज’’, 11 मई, 1926 से) जम्बूसार नगरपालिका में अस्पृश्य
चार हिन्दूओं का त्यागपत्र
जम्बूसार नगरपालिका के लिए एक अस्पृश्य के नगरपालिका सदस्य चुने जाने पर सनसनी फैल गई है। चार हिन्दू सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया और बाकी ने प्रण किया कि वे उस अस्पृश्य सदस्य को छुएंगे नहीं और यदि छू भी लिया तो तुरंत नहायेंगे। मद संख्या 4
(बंबई क्रानीकल से)
‘‘टाइम्स आफ इंडिया’’ ने अपने 24 तारीख के अंक में महाड़ के दंगों पर एक बयान छापा, परन्तु क्योंकि वह बयान अधूरा है और वहां जो हुआ, उसकी सही तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता, इसलिए दंगे का पूरा और सही विवरण देना आवश्यक है।
कोलाबा जिले के दलित जातियों का एक सम्मेलन महाड़ में 19 - 20 मार्च, 1927 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर, बार - एट - ला की अध्यक्षता में हुआ। दलितों की उपस्थिति ढाई हजार से अधिक थी और उनमें भारी उत्साह था। परन्तु दंगे के कारण सम्मेलन के काम में गंभीर बाधा पड़ी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी महाड़ के ऊंची जाति के हिन्दू निवासियों पर है। सम्मेलन के पहले दिन जब अध्यक्षीय भाषण के बाद कई सवर्ण हिन्दुओं ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और दलितों को आश्वासन दिया कि वे हर प्रकार से उनकी सहायता के लिए तैयार हैं और आग्रह किया कि दलित लोग सवर्ण हिन्दुओं के विरुद्ध घृणा न फैलाएं। इसे देखते हुए विषय समिति ने जिस प्रस्ताव का प्रारूप तैयार किया, उसमें यह भी कहा गया था कि ऊंची जाति के हिन्दुओं को दलितों के उत्थान के लिए क्या करना चाहिए। विषय समिति में कुछ लोगों ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि महाड़ में दलित लोगों को पीने के पानी की बहुत दिक्कत है। यह दिक्कत महाड़ के निवासी दलितों के सामने ही नहीं है, बल्कि गांव वालों को भी उठानी पड़ती है, जो व्यक्तिगत कार्यों या सरकारी कार्यों से महाड़ आते हैं। वहां पानी का इतना अभाव है कि सम्मेलन के लिए 15 रुपये रोज का पानी खरीदना पड़ा। कुछ दिन पहले महाड़ नगरपालिका ने एक प्रस्ताव पारित करके यह घोषणा की थी कि शहर के तालाबों पर जनता को जाने की अनुमति है, परन्तु उसने वहां कोई बोर्ड नहीं लगाया था। लोग वहां जाने से डरते थे। इसलिए विषय समिति के सम्मेलन में उच्च जाति के लोगों के विचार इस विषय में जानकर यह फैसला किया गया कि सम्मेलन में शामिल लोग चोदार तालाब पर इकट्ठे होकर जाएं और दलित जाति के लोगों को पानी लेने का उनका अधिकार दिलाने में सहायता दें।