ग. दलित जातियों के हितों की रक्षा - Page 177

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

या बाद में मारपीट की गई। दलितों की विडंबना यह थी कि उनकी संख्या बड़ी जातियों के मुकाबले बहुत कम थी। दलितों के नेताओं ने अधिकारियों से संरक्षण की अपील की है और डी.एस.पी. सहित जिला अधिकारी मौके पर जाकर जांच कर रहे हैं। बहरहाल यह बताना जरूरी है कि यदि रेजीडेंट मजिस्ट्रेट दो घंटे तक हाथ पर हाथ धरे न बैठा रहता तो दंगा रुक सकता था। मद संख्या 5

‘‘यंग इंडिया’’, 5 मई 1927 से)

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मानव का मानव के साथ अमानवीय व्यवहार

(लेखक, मो. क. गांधी)

एक अन्य स्तंभ में नवजीवन से उद्धृत अंश दिया गया है। यह जान बूझकर अमानवीय व्यवहार का अति निंदनीय मामला है। इसमें चिकित्सक ने काठियावाड़ के एक गांव में दलित वर्ग के एक व्यक्ति की मरणासन्न पत्नी के प्रति घोर अमानवीय व्यवहार किया। श्रीयुत अमृतपाल ठक्कर जिसने मामले का विवरण दिया है, उसने स्थान और पार्टियों के नाम नहीं दिए हैं। उन्हें आशंका थी कि कहीं दलित वर्ग के बेचारे स्कूल मास्टर को चिकित्सा कर्मचारी कहीं और परेशान न करें। लेकिन मैं चाहता हूँ कि नाम बताए जाएं। ऐसा समय आना ही चाहिए कि जब हमें दलित वर्गों के लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करना होगा कि वे इससे भी बड़े जुल्मोंसितम सहने की हिम्मत करें। उनकी पीड़ा पहले ही इतनी घनी है कि उसमें और बढ़ोतरी वे महसूस तक न कर पाएंगे। उन कष्टों के विरुद्ध लोकमत तैयार नहीं किया जा सकता, जिनका साक्ष्य न हो और जड़ का पता नहीं चले। मुझे बंबई की मैडिकल काउंसिल के नियमों का पता नहीं है। पर मैं इतना जानता हूँ कि अन्य जगहों पर जो डाक्टर फीस मिलने से पहले मरीज को देखने से इंकार कर देता है, वह काउंसलि के प्रति जवाबदेह होगा। उसका काउंसिल की सूची से नाम काटा जा सकता है अथवा उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। निस्संदेह फीस ली जानी चाहिए, परन्तु किसी डाक्टर का पहला काम मरीज की उचित देखभाल करना है। लेकिन यदि बताए गए तथ्य सही हैं, तो वास्तविक अमानवीयता यह है कि चिकित्सक ने अस्पृश्य के घर जाकर स्वयं मरीज देखने और स्वयं थर्मामीटर लगाने से इंकार कर दिया। यदि किसी भी हालत में अस्पृश्यता का नियम लागू होना है, तो निश्चित रूप से वह इस व्यवसाय के इस व्यक्ति पर लागू होना चाहिए, जिसने व्यवसाय को कलंकित किया है। परन्तु मुझे आशा है कि श्रीयुत ठक्कर के संवाददाता, ने कुछ बढ़ा - चढ़ाकर लिखा है और यदि ऐसा नहीं है, तो चिकित्सक स्वयं सामने आएगा और उस समाज की पर्याप्त भरपाई करेगा जिसे उसने अपने अभद्र व्यवहार से कलंकित किया है।