ग. दलित जातियों के हितों की रक्षा - Page 179

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

II

मेरे जीवन का प्रकाश बुझ गया है। आज दोपहर बाद दो बजे उसका निधन हो गया।

टिप्पणी करना व्यर्थ है। उस डाक्टर की अमानवीयता के बारे में कोई क्या कह सकता है, जिसने शिक्षित होते हुए भी थर्मामीटर लगाने तक से इंकार कर दिया और साफ भी मुसलमान से कराया। उसने दो दिन से तड़प रही एक नारी को कुत्ते बिल्ली से भी गया बीता समझा। कोई उस समाज को क्या कहे, जो इस अमानवीयता को सह रहा है। कोई केवल समझ कर सिर ही धुन सकता है। ए.वी. ठक्कर

मद संख्या 6

‘‘टाइम्स आफ इंडिया’’, 1 - 4 - 28 और 10 - 2 - 28 से) हिन्दुओं का अत्याचार

बलाइयों के लिए नियम निर्धारित जीवनचर्या

पिछले मई के महीने में सवर्ण हिन्दुओं ने अर्थात् कलोटों, राजपूतों और ब्राह्मणों ने जिनमें गांव कनाडि़या, बिचौली हफ्सी, बिचौली, मरदाना और इंदौर जिले के 15 दूसरे गांवों के पटेल व पटवारी भी शामिल हैं, बलाइयों से कहा है कि यदि वे इन गांवों में रहना चाहते हैं, तो उन्हें ये नियम मानने पड़ेंगे : 1. बलाई जरी की किनारी वाली पगड़ी नहीं पहनेंगे; 2. वे रंगीन या फैंसी किनारीदार धोती नहीं पहनेंगे; 3. वे किसी हिन्दू की मृत्यु पर उसके रिश्तेदारों को खबर करेंगे, चाहे वे कितने ही दूर रहते हों; 4. हिन्दुओं के शादी, विवाह के अवसर पर बारात के आगे और शादी के दौरान गाने बजाने का काम करेंगे; 5. बलाई स्त्रियां सोने - चांदी के जेवर नहीं पहन सकतीं, वे फैंसी लंहगे व कुर्ती भी नहीं डाल सकतीं; 6. बलाई स्त्रियां हिन्दुओं की स्त्रियों का प्रसव कराएंगी; 7. बलाइयों को ये खिदमतगारी बिना उजरत के करनी होगी और

खुशी से उन्हें जो दिया जाएगा, उसे वे स्वीकार कर लेंगे; 8. यदि बलाई इन शर्तों को नहीं मानते हैं, तो ये गांव छोड़ दें। बलाइयों का इंकार

बलाइयों ने शर्तें मानने से इंकार कर दिया और हिन्दुओं ने उनके विरुद्ध कार्यवाही शुरू कर दी। बलाइयों का कुओं पर चढ़ना बंद हुआ। उनके पशुओं के चरने पर रोक लगी। हिन्दुओं की जमीन पर होकर गुजरना बंद हुआ। यदि किसी बलाई का खेत हिन्दुओं के खेतों से घिरा है तो उसके रास्ते बंद हुए। हिन्दुओं के जानवर बलाइयों के खेत उजाड़ने लगे। बलाइयों ने दरबार से गुजारिश की परन्तु उन्हें समय पर मदद नहीं मिली और सैंकड़ों बलाई जुल्म सहते रहे। उन्हें अपने बाल-बच्चों सहित वह गांव