मद संख्या 7
‘‘बंबई क्रानिकल’’, 25 फरवरी 1928 से)
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(रूढि़वादिता का पागलपन ‘अस्पृश्यों’ के प्रति कथित
बर्बर व्यवहार महार होने का अपराध)
अहमदाबाद से श्री केशवजी रन-छोड़ वघेला ने बहिष्कृत हितकारिणी सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सूचना दी है :
‘‘बापूराव लक्ष्मण और उनके भाई कौरव पिछले 6 वर्षों से अहमदाबाद में रह रहे हैं। वे मराठा जाति के दक्कन से आए कुछ लोगों के साथ उठते-बैठते थे। दामू और लक्ष्मण नामक कौरव के दो बेटे मराठों की भजन मंडलियों में हिस्सा लिया करते थे। लेकिन हाल में मराठों को पता चला कि दामू और लक्ष्मण नामक दोनों भाई महार जाति के थे और इस बारे में निश्चय करने के लिए सूरत और अहमदाबाद के बीच चलने वाली पार्सल ट्रेन में काम करने वाले दो महारों को दामू और लक्ष्मण को पहचानने के लिए
खास तौर पर बुलाया गया। यह निश्चय कर लेने के बाद कि दामू और लक्ष्मण महार थे, उन्हें इसी महीने की 11 तारीख की आधी रात को कालूपुर भंडारी पोल में भजन मंडली के लिए बुलाया गया। जब पूछा गया कि वे किस जाति के थे, दामू और लक्ष्मण ने उत्तर दिया कि वे सोमवंशी थे। इस उत्तर से मराठे क्रुद्ध हो गए। मराठों ने उन्हें जी भर कर गालियां दी और कहा कि उन्होंने उनके व्यक्तियों और स्थानों को भ्रष्ट किया है। मराठों ने महार बंधुओं की ठुकाई व पिटाई की। एक भाई के पास सोने की अंगूठी थी। वह उससे जबरन छीन ली गई और उसे ग्यारह रुपये में बेच दिया गया। इस रकम में से 6 रुपये उस महार को अदा कर दिए गए, जिसे इन बंधुओं की पहचान के लिए सूरत से बुलाया गया था। दामू और लक्ष्मण ने मराठों से चिरौरी और विनती की कि उन्हें उनके घर लौटने दिया जाए, लेकिन मराठों ने कहा कि वे तभी जा सकते थे जब वे 500 रुपये का जुर्माना अदा कर दें। जब महार बंधुओं ने कहा कि वे इतनी बड़ी रकम तो नहीं दे सकते, तो एक मराठे ने सुझाव दिया कि महार बंधुओं पर केवल 125 रुपये का जुर्माना किया जाए। लेकिन एक मराठे ने जुर्माने के सुझाव का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें केवल जुर्माने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी जाति छिपाने के अपराध के लिए महार बंधुओं को कठोर दंड देना चाहिए।
ऐसा निर्णय कर लेने के बाद महार बंधुओं को रोक लिया गया और सवेरे 9 बजे के लगभग उनका बर्बरतापूर्ण तिरस्कार किया गया। बांई ओर की उनकी मूछें और दांई ओर की उनकी भौंहें उस्तरे से साफ कर दी गईं। उनके शरीरों पर तेल और मिट्टी में सनी कालिख पोत दी गई। उनके गलों में पुराने जूतों की मालाएं डाल दी गइंर्। उनमें से एक के हाथ में झाडू पकड़ा दी गई। दूसरे के हाथ में तख्ती पकड़ा दी गई। उस पर लिखा था कि अपराधियों को दंड इसलिए दिया गया कि उन्होंने उच्च