ग. दलित जातियों के हितों की रक्षा - Page 182

दलित जातियों के हितों की रक्षा

जाति के लोगों को स्पर्श करने का दुस्साहस किया। महार बंधुओं का जुलूस निकाला गया। कोई 75 लोग उसमें साथ थे। आगे आगे ढोल पीटा जा रहा था।

उक्त दोनों महार बंधुओं ने पुलिस से शिकायत की है। अभियुक्त ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि दामू और लक्ष्मण के साथ कथित प्रकार से बर्ताव किया गया, लेकिन कहा कि शिकायत करने वालों ने स्वेच्छा से दंड भुगतना स्वीकार किया था। जाहिर है कि दामू और लक्ष्मण उस समय असहाय थे, जब उन्हें गालियां दी गईं, उन्हें मारा पीटा गया और कठोर दंड की धमकी दी गई और वस्तुतः उनका बर्बरतापूर्वक तिरस्कार किया गया। इस मामले ने तथाकथित अस्पृश्य जातियों के लोगों में भारी सनसनी पैदा कर दी है। शिकायत करने वालों को कानूनी मदद देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।’’ मद संख्या 8

(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, 1927, खंड 20)

(भाग 16, पृ. 1373) पुलिस में महारों की भर्ती

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि प्रेसिडेंसी में पुलिस बल में दलितों की भर्ती पर पाबंदी का कोई नियम है?

माननीय श्री जे. ई.बी. हाट्सन : ऐसा कोई नियम नहीं है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या माननीय सदस्य मुझे बताने की कृपा करेंगे कि बंबई शहर के पुलिस आयुक्त पाबंदी न होते हुए भी दलितों को पुलिस में भर्ती करने से क्यों इंकार करते हैं?

माननीय श्री जे.ई. बी. हाट्सन : यह एक बड़ा मामला है। मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां हैं, जिसे सदन का प्रत्येक सदस्य जानता है और जो पुलिस में इन वर्गों की भर्ती में बाधा है। इस पर कोई पाबंदी नहीं है।

टिप्पणी - श्री हाट्सन द्वारा बताई गई व्यवहारिक कठिनाइयां स्पष्टतः अस्पृश्यता से उत्पन्न कठिनाइयां हैं। मद संख्या 9

(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, 1928, खंड 22)

(भाग 2, पृ. 96 - 97) सरकारी सेवा में क्लर्क

श्री आर.एस. असराले : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि विभिन्न सरकारी विभागों के कार्यालयों में क्लर्कों की संख्या क्या है?

माननीय श्री चुन्नीलाल मेहता : वांछित सूचना देने वाला विवरण सदन के सभा पटल पर रख दिया गया है :