दलित जातियों के हितों की रक्षा
167
हम स्वराज्य प्राप्त नहीं कर सकेंगे। पिछले सात वर्षों के दौरान अस्पृश्यता निवारण के लिए कांग्रेस द्वारा संकल्प पारित किए जाते रहे हैं, परंतु इन सभी गतिविधियों का क्या परिणाम निकला? उच्च शिक्षा प्राप्त लोग अभी भी इस प्रकार की बातें करते हैं। हम कांग्रेस और हिन्दू सभा में ऐसे संकल्प पारित करते हैं, जिनमें मंदिरों में अस्पृश्यों के प्रवेश करने की वकालत की जाती है और आग्रह किया जाता है कि सार्वजनिक जलाशय, कुएं आदि उनके लिए खोल दिए जाएं। परन्तु जब उन पर अमल करने का समय आता है, तो हम अस्पृश्यों की भर्त्सना करते हैं और उन्हें प्रताडि़त करते हैं एवं उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करते हैं तथा उन्हें जेल भिजवाते हैं।
| ad | Y |
|---|
11
मद संख्या
दपोली (जिला रत्नागिरि) में हुए दलित वर्ग सम्मेलन में पारित संकल्प
- (क) यह सम्मेलन इस जिले में दलित वर्गों द्वारा मृत पशुओं का मांस खाने से
इंकार करने के कारण उनके विरुद्ध तथाकथित हिन्दुओं द्वारा चलाए जा रहे
उत्पीड़न के अभियान पर अपना रोष व्यक्त करता है।
(ख) इस सम्मेलन को यह जानकर दुःख हुआ है कि जिले के पुलिस अधिकारी
और मजिस्ट्रेट दलित वर्गों के लोगों के साथ गाली - गलौज करते हैं और
तथाकथित सवर्ण हिन्दुओं के अत्याचार और अन्याय से उनकी रक्षा नहीं
करते। तथा दलित जातियों के पशुओं को काजी हौज में बन्द कर देते हैं
और उनके साथ मारपीट करते हैं और उनका सामाजिक बहिष्कार करके
बाजारों से उन्हें दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं नहीं खरीदने देते।
यह सम्मेलन सरकार से अपील करता है कि वह वतनदार महारों को आम-तौर
पर दिया जाने वाला ‘बलूता’ पारिश्रमिक दिलाने के लिए कार्यवाही करें। इन
महारों को सवर्ण हिन्दू ग्रामीण यह पारिश्रमिक नहीं दे रहे हैं, क्योंकि इन
महारों ने कह दिया है कि वे मृत पशु का मांस नहीं खाएंगे और न वे मृत
पशुओं को उठाएंगे, न भीख मांगेंगे और न अन्य गलीच काम करेंगे। 2. (क) पता चला है कि अनेक गांवों में पुलिस पटेल दलित वर्गों के लोगों के विरुद्ध
उत्पीड़न के आंदोलन को शह देते हैं। अतः यह सम्मेलन सरकार से अनुरोध
करता है कि वह ऐसे पुलिस पटेलों के खिलाफ उचित कार्यवाही करे। (ख) यह सम्मेलन सरकार से अनुरोध करता है कि वह दलित वर्गों की रक्षा के
लिए उनमें से ही एक विशेष पुलिस निरीक्षक प्रत्येक जिले में नियुक्त करे
तथा इन वर्गों के लोगों को पुलिस सेवा में भर्ती करे।
(ग) यह सम्मेलन सरकार से अनुरोध करता है कि वह वादवाल, मातवेन, तुलसी, देगांव,
मंडनगढ़, सतारा आदि गावों में सामूहिक जुर्माना करने वाली पुलिस तुरन्त तैनात
करे और उसकी कमान दलित वर्गों के सैनिक पेंशनरों के हाथ में हो। इस
पुलिस का खर्च इन गांवों में रहने वाले तथाकथित सवर्ण हिन्दू उठाएं, क्योंकि
यह तथ्य है कि उत्पीड़न तथा सामाजिक बहिष्कार तथा खुले आक्रमणों के