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भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष
23 अक्तूबर, 1928 को डॉ. अम्बेडकर
का साक्ष्य
भारतीय सांविधिक आयोग, पूना
दिनांक 23 अक्तूबर 1928
उपस्थिति
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आयोग की केन्द्रीय समिति (राजा नवाब अली खां के सिवाय)
प्रांतीय समिति के और सभी सदस्य
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई समिति के एक सदस्य) और डॉ. पी.जी. सोलंकी (दलित वर्गों के प्रतिनिधि) को बुलाया गया और उनसे पूछताछ की गई।
चेयरमैन : मैंनें अपने सहयोगियों को स्मरण करा देना चाहता हूँ कि हमारे समक्ष ये
दस्तावेज होने चाहिएं : डिप्रेस्ड क्लासेज इन्स्टीटयूट आफ बोंबे की ओर से
डॉ. अम्बेडकर का बयान और डिप्रेस्ड इंडियन एसोसिएशन तथा सर्वेन्ट्स
आफ सोमवंशी सोसायटी का संयुक्त ज्ञापन। डॉ. अम्बेडकर ने अपना
स्थान बदल लिया है, क्योंकि वह हमारे बीच इस समय एक साक्षी के
रूप में हैं। जैसा कि हम जानते हैं, डॉ. अम्बेडकर बंबई कमेटी के एक
सदस्य हैं। डॉ. सोलंकी, मेरा विचार है कि क्या आप या आपकी संस्था
अन्य दस्तावेज देगी?
डॉ. सोलंकी : मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज से सहमत हूँ।
- डॉ. अम्बेडकर, मैं चाहूंगा कि आप हमें बताएं कि इस प्रेसिडेंसी में दलित वर्गों के लोगों की संख्या क्या है? क्या इस संबंध में आप हमारी सहायता कर सकते हैं?
* भारतीय सांविधिक आयोग, खंड 16, ज्ञापनों और मौखिक साक्ष्य से लिया गया उद्धरण। सम्राट के स्टेशनरी आफिस लंदन से 1930 में प्रकाशित, पृष्ठ 52 - 75 यह आयोग इसके अध्यक्ष माननीय जान साइमन के नाम से लोकप्रिय है।