170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार से दलित वर्गों के लोगों की संख्या बंबई सरकार द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन के अनुसार लगभग 1478390 है, जो ज्ञापन के पृष्ठ 3 (खंड 7) पर दी गई है।
- वह कहती है, ‘‘1921 की जनगणना के अनुसार दलितों की संख्या 1478390 के करीब है, जिनमें मुख्य रूप से ढेढ़, मांग, महार और होलिया सम्मिलित हैं। आपका इस संख्या के विषय में क्या विचार है?
डॉ. अम्बेडकर : आप देखेंगे कि मैंने ज्ञापन के पृष्ठ 39 पर यह संख्या लगभग 28 लाख बताई है।
- क्या आप समझते हैं कि यह संख्या 2800,000 होनी चाहिए?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- यह अंतर क्यों है?
डॉ. अम्बेडकर : सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगा कि बंबई सरकार ने जो आंकडे़ दिए हैं, मैं समझता हूँ, वे भारत की गणना, 1921, खंड 8, बंबई प्रेसिडेंसी भाग 2 से लिए गए हैं। इसकी तालिकाएं पृष्ठ 176 से आरंभ होती हैं, जब कि अपने ज्ञापन में मैंने जो आंकड़ें दिए हैं, वे भारत की जनगणना, 1921, खंड 1, अध्याय 11 से लिए गए हैं। ये आंकड़ें जनसंख्या निदेशक के हैं जिसने विभिन्न प्रांतों से आंकड़े एकत्र किए हैं और उनके आंकड़े को मैंने ज्यों का त्यों ले लिया है। वे मेरे ज्ञापन के पृष्ठ 39 पर ‘भारत में दलितों की संख्या’ शीर्षक के अंतर्गत दिए गए हैं। इनमें प्रत्येक प्रांत में दलितों की संख्या दर्शाई गई है। अतः इन दोनों तरह के आंकड़ों में इसी कारण से अंतर हैं। दरअसल, ये आंकड़े, चाहे केन्द्रीय हों और चाहे प्रांतीय, पूरी तरह कभी सही नहीं हो सकते। वास्तव में, यदि यह सम्मेलन भारत के जनगणना निदेशक की उन टिप्पणियों को देखे, जिन्हें मैंने अपने ज्ञापन के पृष्ठ 39 पर शुरू में उद्धृत किया है, तो पता चलेगा कि दलितों की कुल अनुमानित संख्या बताने के बाद वह कहते हैं (देखिए ज्ञापन का पृष्ठ 39, देखिए इसी पुस्तक के पृष्ठ 426 - 37 पर पैरा 7, उद्धरण पैरा 193 [*] ) ‘‘तथापि हमें मोटे तौर पर लगाया गया अनुमान समझना चाहिए क्योंकि इसमें (1) सम्बद्ध जातियों और जनजातियों की और (2) हाल ही में हिन्दू धर्म में शामिल किए गए उन जनजातीय आदिवासियों की पूरी संख्या दी गई है, जिनमें से अधिकांश को अपवित्र माना जाता है। हम विश्वासपूर्वक दलितों की संख्या बता सकते हैं, जिनका रक्त शुद्ध नहीं माना जाता है। वे सम्पूर्ण भारत में साढ़े पाँच करोड़ से छह करोड़ के बीच हैं। फिर वह हर प्रांत के आंकड़े देते हैं।’’
- आपको बुरा तो नहीं लगेगा, यदि मैं सही आंकड़ों के संदर्भ में नहीं, बल्कि दो अवधारणाओं के बीच तुलना करके अपनी दुविधा दूर करना चाहूं? यह स्पष्ट है कि यदि कुछ अधिकारी जनसंख्या के विवरण की सत्यता के बारे में बोलते हुए कुल संख्या 1478000 बताते हैं और दूसरे अधिकारी भी बारीकी से कहते हैं कि यह संख्या 2800,000
* देखिए इसी पुस्तक के पृष्ठ 436 - 37 पर पैरा 7, उद्धरण पैरा 193।