घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 188

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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के लगभग है, तो यह निश्चित है कि दूसरे अधिकारियों ने उन लोगों को अपने आंकड़ों में शामिल कर लिया होगा, जिन्हें पहले अधिकारियों ने नहीं किया होगा।

डॉ. अम्बेडकर : ऐसा ही हुआ है और इसीलिए मैं सम्मेलन को बता देना चाहता हूँ कि प्रांतीय आंकड़ों में कुछ उन जातियों को शामिल नहीं किया गया है, जो वास्तव में अस्पृश्य जातियां हैं।

  1. क्या हम इसे इस प्रकार कह सकते हैं? देखिए कृपया मुझे बता दें कि मैं इसे ठीक से समझ पाया हूँ या नहीं। मैं इसका यथासंभव अध्ययन कर रहा हूँ, हालांकि मुझे आपकी और डॉ. सोलंकी की सहायता वांछित है। ‘‘दलित वर्गों’’ शब्द का तात्पर्य आप उन अस्पृश्यों से ले रहे हैं, जो हिन्दू हैं परन्तु जिनका हिन्दुओं के मंदिरों में प्रवेश वर्जित है। क्या यह ठीक है?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. दूसरे शब्दों में आप दलित वर्गों में केवल उन्हीं लोगों को सम्मिलित नहीं करते, जिनका मैंने जिक्र किया है, बल्कि जरायम पेशा जातियों, पर्वतीय जनजातियों और अन्य लोगों को भी, जिनका समाज में निम्न स्थान है और जो हिन्दू परम्परा के अनुसार संकीर्ण दृष्टि से संभवतः अस्पृश्य नहीं हैं, उन्हें भी शामिल कर लेते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : ठीक है।

  1. क्या यह संभावित दृष्टिकोण नहीं है।

डॉ. अम्बेडकर : हां, यह संभावित दृष्टिकोण है।

  1. क्या यह इस बात का सही स्पष्टीकरण नहीं है कि किस कारण आप कुछ संदर्भों में उन दलित वर्गों को, जो अस्पृश्य हैं और जिनका हिन्दुओं के मंदिरों में प्रवेश वर्जित है, उन्हीं के एक निश्चित आंकड़े ले लेते हैं, जब कि दूसरी ओर आप कभी - कभी इससे बड़े आंकड़े ले लेते हैं, जिनमें आप जरायम पेशा और पर्वतीय जनजातियों को भी शामिल कर लेते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार से ऐसा नहीं है, क्योंकि जो आंकड़ें मैंने दिए हैं, वे जरायम पेशा और पर्वतीय जनजातियों से भिन्न दलित वर्गों से सम्बद्ध हैं।

  1. मैं आपको बता दूं। मेरे सामने ये तीन आंकड़े हैं। अस्पृश्यों के बारे में एक आंकड़ा 1478000 है जो 1921 की जनगणना से लिया गया है और जिसमें महार, ढेढ़ आदि शामिल हैं। फिर मेरे पास जरायम पेशा जातियों की लम्बी सूची है जिसका आंकड़ा 589000 है। तीसरी सूची आदिम जातियों और पर्वतीय जनजातियों की है। भील और ऐसे ही लोग इनमें हैं, जो करीब 10 लाख हैं।

यदि हम पहले आंकड़े में आदिमजातियों और जरायम पेशा जातियों की संख्या जोड़ दें, तो इनका योग लगभग 2800,000 के आसपास बैठता है।