घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 189

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

डॉ. अम्बेडकर : अपने ज्ञापन के पृष्ठ 39 पर, जो उद्धरण मैंने दिया है, उसे मैंने जनगणना निदेशक की टिप्पणी से लिया है। उससे मुझे आभास मिलता है कि ये आंकड़े केवल दलित वर्गों के बारे में हैं। मेरा विचार है कि जनगणना निदेशक ने, जो आंकड़े एकत्र किए हैं और उनके माध्यम से, जो मेरे ज्ञापन के पृष्ठ 39 पर उल्लिखित हैं, वह संख्या दलित वर्गों के बारे में है।

  1. 1921 के लिए भारत के जनगणना निदेशक ने कहा है : ‘‘पिछले कुछ वर्षों से समाज के एक वर्ग विशेष को ‘दलित वर्ग’ कहा जाता है। जहां तक मुझे ज्ञात है, इस शब्द की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। ना ही यह निश्चित है कि सही - सही कौन इसके अधीन आते हैं।’’ फिर वह शिक्षा संबंधी कुछ आलोचनाओं का उल्लेख करते हैं। आपका अभिप्राय क्या इसी पैरे से है?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, और ‘‘इन सूचियों के अनुसार दलितों की संख्या 3 करोड़ 10 लाख बैठती है अर्थात् यह ब्रिटिश भारत के हिन्दुओं और जनजातियों के लोगों की संख्या का 19 प्रतिशत है।’’ इस टिप्पणी के अनुसार ऐसा लगता है कि जनजातियों को दलित वर्गों में शामिल नहीं किया गया है।

  1. मुझे पता नहीं। खैर, यह व्याख्या भी संभव है और मैं समझता हूँ कि आप इससे सहमत हैं कि एक संभावित व्याख्या यह है कि अस्पृश्यों का कम आंकड़ा उसी तरह का आंकड़ा है, जैसा कि मैंने परिभाषित करने की कोशिश की है। मेरे विचार से आप सहमत होंगे कि यही संभावित विचार है। यह स्पष्ट है कि कई उद्देश्यों से उन लोगों के उत्थान के लिए प्रयत्नशील लोग, जो अत्यंत दलित हैं, अपने सर्वेक्षण में लोगों की व्यापक संख्या को शामिल करना ही चाहेंगे, जिनमें जरायम पेशा व पर्वतीय जनजातियां शामिल हैं। क्या यह संभव है?

डॉ. अम्बेडकर : यह संभव है।

  1. मैं आपको एक अन्य संभावित विचार बताता हूँ। मैं कह नहीं सकता कि यह लागू होता है या नहीं। अपने दस्तावेज में पृष्ठ 39 पर आपने बिल्कुल सही कहा है कि यदि आप प्रांतीय आंकड़े भी जोड़ दें, तो सबका योग संपूर्ण भारत में साढ़े पांच करोड़ से छह करोड़ बैठता है।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. मेरा ख्याल है कि आपने ‘भारत’ में देशी राज्यों को भी जोड़ लिया है।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, परन्तु मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि ऐसा लगता है कि उन्होंने देशी राज्यों को शामिल नहीं किया है, क्योंकि उन्होंने बड़ौदा के लिए अलग आंकड़े दिए हैं।

  1. शायद उन्होंने एक - दो बड़े देशी राज्यों को शामिल कर लिया है।

डॉ. अम्बेडकर : शायद, आंकड़े ऐसे ही लगते हैं।