भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष
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- हम आंकड़ों पर ही इतना समय नहीं देना चाहते, क्योंकि सही आंकड़े भले ही 15 लाख हों या 20 लाख हों या 25 लाख हों, यह स्पष्ट है कि इन लोगों की संख्या बहुत बढ़ी है और ये वे लोग हैं, जिनकी ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए?
डॉ. अम्बेडकर : यहां मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि जिन आंकड़ों से ये लिए गए हैं, वे प्रांतीय आंकड़े हैं। वे उस तालिका में है, जिसमें सभी मुख्य भारतीय जातियों का उल्लेख है। यह कोई संपूर्ण तालिका नहीं है और इस तालिका में उल्लिखित विभिन्न जातियों के बारे में मुझे पता चला है कि इसमें लगभग उन दस जातियों का तो नाम ही नहीं है, जो निश्चिय ही जातियां है। उन्हें भारत की मुख्य जातियों में शामिल नहीं किया गया है।
- यदि आप दोनों सहमत होते हैं, तो मैं एक सुझाव देना चाहता हूँ। आपने आंकड़ों संबंधी मुख्य बातों की ओर ध्यान दिलाया है और मेरा विचार है कि बेहतर यही होगा कि हम शत - प्रतिशत सही आंकड़ों के पचड़े में न पड़ें और इन आंकड़ों से यथाशीघ्र छुटकारा पा लें। तभी हम इन जातियों की स्थिति और इनके साथ किये जा रहे व्यवहार के प्रश्न पर विचार कर सकते हैं। अन्यथा हम इन आंकड़ों में ही लम्बे समय तक उलझे रहेंगे। मैंने वही पूछा है, जो मेरे विचार में संगत है और मैं समझता हूँ कि संकुचित दृष्टिकोण अपनाएंगे, तो यह आंकड़ा 15 लाख होगा और यदि व्यापक दृष्टिकोण अपनायेंगे, तो यह 20 और 30 लाख के बीच होगा। मेरे विचार में आपने ऐसा ही कहा है।
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, परन्तु इस शर्त के साथ कि बंबई की दस जातियों को नहीं गिना गया है।
चेयरमैन : हम असल बात पर आना चाहते हैं और वह है, उनका प्रतिनिधित्व। क्या कोई इन आंकड़ों में पड़ा रहना चाहता है? श्री राजा, क्या आप संतुष्ट हैं कि हम यह समझें कि आंकड़े कुछ - कुछ ऐसे ही हैं?
राव बहादुर राजा : कौन से आंकड़े?
चेयरमैन : क्या आपका विचार है कि हम वास्तव में महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार करें, जो उनके प्रतिनिधित्व से संबधित है और यह मान लें कि बंबई प्रेसिडेंसी में 1921 की जनगणना में 15 लाख का आंकड़ा दिया गया है, परन्तु जैसा मैंने पहले भी कहा, दलितों की संख्या बहुत संकुचित दृष्टिकोण अपना कर बताई गई है। वे धर्म की दृष्टि से अस्पृश्य हैं, परन्तु जैसा कि डॉ. अम्बेडकर ने कहा है कि यदि आप सही और उदार दृष्टिकोण अपनाएं, तो वास्तविक आकंड़े 20 - 30 लाख के बीच हैं। क्या यह सही नहीं है?
राव बहादुर राजा : जी हां, यह ठीक है।
चेयरमैन : क्या इस बारे में कोई कुछ और कहना चाहता है?