घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 191

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

  1. कर्नल लेन फौक्स : जो दो ज्ञापन हमें मिले हैं, वे किन आंकड़ों पर आधारित हैं? प्रत्येक ज्ञापन में आपने दलितों के लिए विशेष प्रतिनिधित्व मांगा है। एक ज्ञापन में आप वयस्क मताधिकार की मांग करते हैं और आपने सेना, नौसेना और अन्य नौकरियों में विशेष भर्ती की मांग की है। यदि आप यह आदिम जातियों और जरायम पेशा जातियों के लिए भी मांगते हैं, तो स्पष्टतः यह बहुत बड़ी बात है। यह सुविधाएं आपने बड़ी संख्या के लिए मांगी हैं या छोटी संख्या के लिए?

डॉ. अम्बेडकर : मैंने यह दलित वर्गों के लिए मांगी हैं।

  1. आदिम जातियों और जरायम पेशा जातियों के लिए भी?

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं, मैं नहीं समझता कि उन्हें वयस्क मताधिकार देना संभव होगा।

  1. परन्तु आप बड़ी संख्या का उल्लेख करते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मैं इस बात को बिल्कुल नहीं मान रहा हूँ कि मैंने अपने ज्ञापन में जो संख्या दी है, उसमें आदिम जातियां और पर्वतीय जनजातियां भी शामिल हैं। मैं अब भी यही कहता हूँ कि यदि सही हिसाब लगाया जाए, तो मैंने जो आंकड़े दिए हैं, वे दलित वर्गों से संबंधित हैं। मैं स्वीकार करता हूँ कि दूसरा दृष्टिकोण भी संभव हो सकता है।

चेयरमैन : मैं केवल एक बात और कहना चाहता हूँ। माननीय आर्थर फ्रूम इसकी पुष्टि करेंगे। मैंने देखा है, मुडीमैन कमेटी (सुधार जांच कमेटी, 1925) की रिपोर्ट के पैरा 64 में संलग्न तालिका में यह संख्या 2800000 दी गई है।

  1. माननीय हरिसिंह गौड़ : डॉ. अम्बेडकर, क्या आप दलित वर्गों और अस्पृश्यों को एक दूसरे का पर्याय मानते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. दलित वर्गों के लिए विशेष प्रतिनिधित्व मांगते समय क्या आप केवल अस्पृश्यों के ही लिए इसकी ही मांग करते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. आपका कहना है कि कुछ आदिम जातियां अस्पृश्य नहीं हैं?

डॉ. अम्बेडकर : हो सकता है कि कुछ भागों में वे हों। मैं उनकी पैरवी नहीं करता।

  1. वे अस्पृश्य नहीं है, जरायम पेशा जातियां भी अस्पृश्य नहीं हैं?

डॉ. अम्बेडकर : उनमें से कुछ हैं।

  1. कुछ हैं, लेकिन जाति के रूप में नहीं?