घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 193

176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

वर्जित है...

चेयरमैन : मेरे विचार में यह हम सब समझते हैं। तथापि, हम हिन्दू धर्म के लिए कोई कानून नहीं बना रहे हैं, बल्कि ब्रिटिश भारत के ढांचे पर विचार कर रहे हैं, जो बिल्कुल अलग बात है।

  1. उस आंकड़े के आधार पर आप कौन से मार्ग को उचित ठहराना चाहते हैं, जिसके द्वारा भारत के संविधान में, खासकर बंबई प्रेसिडेंसी के संविधान में इन लोगों के लिए व्यवस्था की जाए?

डॉ. अम्बेडकर : पहली बात तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि हम दावा करते हैं कि हमें हिन्दुओं से अलग एक विशिष्ट अल्पसंख्यक माना जाए। अभी तक हमें हिन्दुओं में शामिल करके हमारे अल्पसंख्यक स्वरूप को छिपाया गया है परन्तु वास्तव में दलित वर्गों और हिन्दुओं के बीच कोई संपर्क नहीं। इसलिए सम्मेलन के सामने पहली बात मैं यह रखना चाहता हूँ कि हमें एक विशिष्ट और स्वतंत्र अल्पसंख्यक माना जाए। दूसरे मैं यह कहना चाहूंगा कि ब्रिटिश भारत में दलित वर्गों के अल्पसंख्यक वर्ग को किसी अन्य अल्पसंख्यक वर्ग की अपेक्षा कहीं अधिक राजनीतिक संरक्षण की आवश्यकता है, क्योंकि शिक्षा की दृष्टि से दलितों का अल्पसंख्यक वर्ग बहुत पिछड़ा है अर्थात् आर्थिक दृष्टि से निर्धन है, सामाजिक दृष्टि से बंधा हुआ है और ऐसी राजनीतिक विवशताओं से ग्रस्त है, जिनसे कोई अन्य वर्ग ग्रस्त नहीं है। हम मुस्लिम अल्पसंख्यक वर्ग की तरह का प्रतिनिधित्व चाहते हैं। हम आरक्षित सीटें चाहते हैं, यदि वे वयस्क मताधिकार के साथ दी जाएं।

  1. और यदि वयस्क मताधिकार न हो तो?

डॉ. अम्बेडकर : तब हम पृथक निर्वाचक - मंडल की मांग करेंगे। तब हम यदि संभव हो, तो संविधान में कतिपय रक्षोपायों की व्यवस्था करना चाहेंगे या हम चाहेंगे कि इन रक्षोपायों को दलित वर्गों की शिक्षा तथा सरकारी सेवाओं में उनके प्रवेश संबंधी गर्वनर के करार में उन्हें सलाह के रूप में स्थान दिया जाए।

  1. क्या हम डॉ. सोलंकी से पूछ सकते हैं कि वे इन मुद्दों पर सहमत हैं?

डॉ. सोलंकी : मैं सभी मुद्दों पर सहमत हूँ।

  1. तब हम ऐसा समझें कि आप दोनों महानुभावों का यही विचार है?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या यह सुविधाजनक रहेगा कि मैं इन मुद्दों पर एक - दो प्रश्न करूं? आपका दावा है कि यद्यपि दलित वर्गों को हिन्दुओं में शामिल किया गया है तथापि क्या उनको संविधान की दृष्टि से उन जातियों से, जो हिन्दू मानी जाती हैं, एक विशिष्ट और पृथक समुदाय माना जाए?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।