घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 194

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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  1. क्या यह इस आधार पर है कि आपके विचार से दलित वर्गों को ऊंची जाति के हिन्दुओं से यह अपेक्षा नहीं है कि वे उनके हितों का संतोषजनक प्रतिनिधित्व कर सकेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : यह तो एक पहलू है, बल्कि सही बात तो यह है कि हमें हिन्दू समाज का अंग नहीं समझा जा सकता।

  1. मैं समझता हूँ कि आप इस महाद्वीप के प्राचीन निवासियों से संबद्ध हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार से यह एक दृष्टिकोण है।

  1. हम विस्तार में नहीं जाते। ऐसा माना जाता है कि आप आर्यों से भी पहले के हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे ज्ञान नहीं है। एक विचार यह भी है।

* * * *

  1. मैं आपसे केवल एक प्रश्न पूछता हूँ, क्योंकि हिन्दुओं के कई प्रतिष्ठित नेता हैं - मैं कोई नाम नहीं लूंगा - जिन्होंने दलित वर्गों के बारे में निसंदेह गहरी रुचि दिखाई है। इस बारे में कोई मतभेद नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, इस बारे में लोग बहुत - सी बातें करते हैं।

  1. मैं जानता हूँ परन्तु यह आपका विचार है। आप कहते हैं कि संवैधानिक दृष्टि से आपको विशिष्ट और पृथक समुदाय माना जाए।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. जहां तक प्रतिनिधित्व का प्रश्न है, मैंने अनुभव किया है कि चाहे वयस्क मताधिकार हो या न हो, लगता है आप मनोनयन के विचार से सहमत नहीं हैं। आप चुनाव चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या आप दोनों का यही विचार है?

डॉ. सोलंकी : जी हां।

  1. इसका मतलब यह है कि आपको मतदाता - सूची तैयार करनी होगी?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. और आपको यह निश्चित करना होगा कि जो व्यक्ति मत देने के लिए आता है, वह वही व्यक्ति है, जिसका नाम सूची में दर्ज है।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. डॉ. अम्बेडकर, क्या आप मुझे यह बता सकते हैं कि जिन लोगों को आप दलित जातियां कहते हैं, उनमें कितने प्रतिशत पढ़ सकते हैं?