178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
डॉ. अम्बेडकर : एक अलग ज्ञापन में, जिसे मैंने बंबई प्रेसिडेंसी में शिक्षा आयोग को दिया है, यह संख्या बताई है।
- मेरा विचार है, यह तो बहुत कम अनुपात है?
डॉ. अम्बेडकर : बेशक?
- एक शिकायत यह भी है कि वे अन्य भाग्यशाली लोगों की भांति स्कूल नहीं जा सकते?
डॉ. अम्बेडकर : बिल्कुल ऐसी ही बात है।
- तो इसका मतलब यह हुआ कि यदि चुनाव कराया जाता है तो मतदान में लगभग सभी ऐसे लोग मतदान करेंगे जो स्वयं मतपत्र को समझते भी नहीं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां। यह बात आज भी अधिकांश मतदाताओं पर लागू होती है।
- यह बात सही है। अब आप मुझे यह बताएं कि बंबई प्रेसिडेंसी में आप दलित वर्गों के लिए कितनी सीटें आरक्षित रखने का सुझाव देंगे?
डॉ. अम्बेडकर : जो योजना मैंने तैयार की है, उसमें मैंने 140 में से 22 सीटें मांगी हैं।
- क्या आप यह सुझाव देना चाहते हैं कि बम्बई परिषद् के लिए सभी निर्वाचित सदस्यों की संख्या 140 हो, तो जिस समुदाय की आप बात कर रहे हैं, उसे 22 निर्वाचित स्थान मिलने चाहिए।
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- और यदि हम आपका दूसरा विकल्प लें, तो वयस्क मताधिकार नहीं होगा। तब आप अलग निर्वाचक - मंडल की मांग करेंगे। आप फिर भी 22 सीटें चाहेंगे।
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- मैं आपसे एक बात और पूछूंगा। मैं समझता हूँ कि श्री राजा, स्वयं आपसे सामाजिक स्थिति जानने के लिए कुछ और प्रश्न पूछना चाहेंगे। इस समय बंबई प्रेसिडेंसी में दलित वर्गों के दो सदस्य हैं, जो दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने के लिए मनोनीत किए गए हैं?
डॉ. अम्बेडकर : ऐसी ही बात है।
- आप उनमें से एक हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- और डॉ. सोलंकी दूसरे हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- क्या इसका आधार साउथबरो कमेटी की रिपोर्ट है?