घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 196

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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डॉ. अम्बेडकर : जी, मुझे ऐसा ही लगता है।

  1. मेरे विचार में आपने साउथबरो कमेटी के समक्ष साक्ष्य दिया था?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. उस कमेटी के समक्ष दिया गया आपका साक्ष्य मैं पढ़ रहा था और मैं यह देख रहा था कि आपने तब दलित वर्गों के कितने सदस्य बताए थे। मेरे ख्याल से आपने अपने ज्ञापन के पृष्ठ 39 की टिप्पणी में लिखा है कि साउथबरो कमेटी ने बंबई प्रेसिडेंसी में दलितों की संख्या 577000 बताई है।

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. मेरे ख्याल से आपका विचार है कि वह एक गलती थी?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, एक बहुत बड़ी गलती थी।

  1. क्या आप मुझे बता सकते हैं कि उन्होंने यह संख्या कैसे निकाली? क्या आप कुछ जानते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में उन्होंने उन जातियों की एक छोटी सी तालिका बनाई जिनका स्पर्श मात्र अपवित्र कर देता है।

  1. यह दलित वर्गों की और भी संकुचित परिभाषा है?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. श्री हौट्सहोर्न : इस टिप्पणी में आपने साउथबरो कमेटी के 5,77,000 की संख्या का उल्लेख करते हुए कहा है कि उस प्राधिकारी के अनुसार जिस पर साउथबरो कमेटी ने विश्वास किया है, 1911 में बंबई प्रेसिडेंसी में दलितों की संख्या 2,145,000 थी।

डॉ. अम्बेडकर : जनगणना में।

  1. आपने उसी प्राधिकारी पर विश्वास किया था? मैं यही जानना चाहता था।

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां। यदि मुझे ठीक से याद है, तो प्राधिकारी ने दो अलग - अलग पृष्ठों पर दो अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। एक पृष्ठ पर उसने कम संख्या दिखाई है और जब साउथबरो कमेटी की रिपोर्ट छपी, तो हमने बंबई सरकार से इस अनुमान के विरुद्ध विरोध प्रकट किया।

  1. चेयरमैन : मेरे विचार में 21,00,000 का आंकड़ा बिल्कुल स्पष्ट है। 1921 की जनगणना में अस्पृश्यों की संख्या जो 14,78,000 थी, को जरायम पेशा जातियों की संख्या जो 6,23,000 थी, के साथ जोड़ दिया गया और इन दोनों को मिलाकर यह संख्या 2,100,000 हो जाती है।

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. इसमें आदिम जातियां और पर्वतीय जनजातियां नहीं हैं। वे छोड़ दी गई हैं?