घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 197

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. श्री मिलर : मैं कुछ देशी राज्यों की स्थिति के बारे में जानना चाहूंगा। बड़ौदा और एक अन्य राज्य में जहां कुछ विशेष सुविधाएं बताई गई हैं, क्या वे विशेष सुविधाएं शिक्षा संबंधी सुविधाओं के अलावा भी कुछ हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी, नहीं। उनके अलावा कुछ नहीं।

  1. क्या आप देशी राज्य में नौकरी पा सकते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में यह बहुत मुश्किल होगा।

  1. क्या आप सरकारी सेवा में नियुक्तियां लेने के विशेष रूप से इच्छुक हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, निश्चित रूप से।

  1. ऐसा क्यों?

डॉ. अम्बेडकर : इस विषय पर मैं यह कहना चाहता हूँ कि जहां तक विधि प्रशासन का सवाल है, हमारा अनुभव बड़ा कड़ुवा है। मैं पूरा बल देकर कहना चाहूंगा कि अनेक मामलों में कानून दलितों के विरुद्ध लागू किया जाता है। मैं जिले का नाम बताए बिना एक जिले में हुई एक घटना का उल्लेख करना चाहूंगा। बंबई सरकार प्रतिवर्ष कुछ निश्चित शर्तों पर गांव वालों को जंगलात की कुछ जमीन खेती के लिए देती है। हमें पता चला कि जंगलात की इस भूमि के आवंटन में दलित वर्ग के लोग टुकुर - टुकुर देखते रह जाते हैं। एक व्यक्ति को, जो एक श्रमिक था और प्रायः भूमिहीन था या उसके पास बहुत कम भूमि थी और जो अपनी आर्थिक दशा सुधारने की कोशिश में था, को जंगलात की भूमि में कोई हिस्सा नहीं मिला। मामलादारों ने, जिन्हें इस भूमि के वितरण का कार्य सौंपा गया था, सवर्ण हिन्दुओं के साथ पूरा पक्षपात किया और दलित वर्गों की उपेक्षा की। एक जिले में पिछले साल हमने संगठन बनाया और उस जिले के असिस्टेंट डिप्टी कलक्टर के पास एक प्रतिनिधिमंडल भेजा और उस जंगलात की जमीन के बारे में अपनी शिकायतें बताईं। उसने मामलातदारों को एक परिपत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि दलितों की अर्जियों पर गौर किया जाए। कुछ मामलातदारों ने यह जताने के लिए कि वे परिपत्र पर अमल कर रहे हैं कुछ जमीन दलितों को भी दे दी। परन्तु हमने देखा कि उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया था। कागज पर उन्होंने दलितों को कुछ जमीन दे दी और सवर्ण हिन्दुओं को बहुत कम जमीन दी, परन्तु जब वास्तविकता सामने आई तो हमें पता चला कि, जो जमीन दलित वर्गों को दी गई थी, वह चट्टानों से भरी थी और खेती के लायक नहीं थी। दलित वर्ग के लोग उसे किसी तरह भी नहीं लेंगे और सवर्ण हिन्दुओं को दी गई जमीन, जो क्षेत्रफल में यद्यपि कम थी तथापि वह खूब उपजाऊ थी। मेरे विचार में यह अधिकारियों को दिए गए प्रशासनिक अधिकार का घोर दुरुपयोग है और व्यक्तिगत रूप से मैं विधि के अधिक चालाकी भरे प्रशासन की अपेक्षा विधि के अधिक सदाशयपूर्ण प्रशासन को कहीं अधिक महत्व देता हूँ।