घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 199

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

  1. श्री मिलर : एक और बात भी पूछना चाहूंगा। यदि परिषद् में आपको 22 सीटें मिल जाती हैं, तो क्या आप 22 योग्य व्यक्ति ला सकेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, मेरे विचार से हम ला सकते हैं?

  1. खान साहेब अब्दुल लतीफ : क्या आप सम्मेलन के सदस्यों को बताएंगे कि बंबई परिषद् में जब किन्हीं कारणों से अल्पसंख्यकों का अधिकारी समूह हट जाता है, तो अल्पसंख्यकों का क्या हाल होता होगा?

डॉ. अम्बेडकर : मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि अल्पसंख्यकों की हालत खस्ता ही होगी।

  1. क्या उन्नत जाति के मंत्री महोदय उन परियोजनाओं पर अथवा मुसलमानों, गैर - ब्राह्मणों या दलित वर्गों की भावनाओं की ओर कोई ध्यान देते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं, बिल्कुल नहीं।

  1. क्या अल्पसंख्यक बंबई विधान परिषद् में कोई विधेयक पास करवा सकते हैं या उसे पेश कर सकते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : ऐसे अवसर ‘ना’ के बराबर हैं।

* * * *

  1. सरदार मजूमदार : क्या यह सच नहीं है कि दलित वर्गों में भी अनेक जातियां हैं जो दलित वर्ग कहलाती हैं अर्थात् दलित वर्गों में भी भिन्न - भिन्न जातियां हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या आप मुझे उन जातियों की अनुमानित संख्या बता सकते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार से आपको वह संख्या जनगणना के आंकड़ों में मिल जाएगी जहां विभिन्न जातियों को अस्पृश्य दिखाया गया है।

  1. उन विभिन्न जातियों की संख्या क्या है?

डॉ. अम्बेडकर : जनगणनानुसार लगभग एक दर्जन।

  1. बंबई में दलित वर्गों में कितनी जातियां शामिल हैं?

डॉ. अम्बेडकर : लगभग सभी जातियां।

  1. तब विभिन्न जातियों के सदस्य आपके संगठन के सदस्य हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, यह एक सामान्य संस्था है, जिसमें सभी दलित वर्ग शामिल हैं।

  1. ताकि उन सभी को दलित वर्गों में शामिल कर लिया जाए?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. क्या आपने भीलों और वाडियाओं और अन्य लोगों के दावों पर विचार कर