घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 200

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

लिया है?

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डॉ. अम्बेडकर : जी, नहीं।

  1. आप उन अल्पसंख्यकों के संरक्षण के बारे में क्या कहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार से उन्हें भी प्रतिनिधित्व देकर कुछ संरक्षण प्रदान किया जाए।

  1. क्या आप ऐसा नहीं सोचते हैं कि पिछड़े वर्गों में भी कुछ जातियां ऐसी हैं जो अल्पसंख्यक हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

106 (क) तो क्या इस संविधान में उनके हितों की रक्षा के लिए कोई प्रावधान है?

चेयरमैन : जिन जातियों का आपने उल्लेख किया है, क्या उनको हिन्दुओं के मंदिरों में जाने की मनाही है?

सरदार मजूमदार : जी नहीं, वे मंदिर जा सकते हैं।

चेयरमैन : आज हम वास्तव में अस्पृश्यों और उन लोगों के मामले पर विचार कर रहे हैं, जिन्हें हिन्दुओं के मंदिरों में नहीं जाने दिया जाता। मेरे विचार में हम उन पिछड़े वर्गों के प्रश्न पर विचार नहीं कर सकते, जिन्हें हिन्दुओं के मंदिरों में जाने दिया जाएगा।

सरदार मजूमदार : मेरा कहना यह है कि पिछड़े वर्गों में भी विभिन्न अल्पसंख्यक जातियां हैं। उपयुक्तता के प्रश्न से हमारा कोई संबंध नहीं है। हम तो यहां पर सभी अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए हैं।

चेयरमैन : निश्चित रूप से।

सरदार मजूमदार : उसी दृष्टि से मैंने यह प्रश्न पूछा था।

चेयरमैन : मैं आपका तुरन्त समाधान कर देता हूँ। भारत अल्पसंख्यकों से भरा पड़ा है और आपने उनमें से कुछ का जिक्र किया है, परन्तु आज हमें केवल दलित वर्गों के बारे में विचार करना है।

सरदार मजूमदार : ठीक है, महोदय।

  1. सैयद मिरान मोहम्मद शाह : आपने अभी कहा है कि आप उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व चाहते हैं, जितना मुसलमानों को प्राप्त है?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. क्या आपको इसीलिए चाहिए कि यह मुसलमानों को प्राप्त है? क्या यह आपके लिए न्यायसंगत है?