घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 201

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

डॉ. अम्बेडकर : मुझे यह बात न्यायसंगत लगती है। मैं विधायिका की सदस्य संख्या के अनुसार अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त को बिल्कुल स्वीकार नहीं करता, क्योंकि मुझे यह ऐसा लगता है कि जैसे विधायिका कोई संग्रहालय हो, जिसमें हमें विभिन्न समुदायों के विभिन्न नमूने रखने हों। एक विधान परिषद् संग्रहालय से अधिक है। उदाहरण के लिए यह एक ऐसा स्थान है, जहां सामाजिक लड़ाइयां लड़नी होती हैं, विशेषाधिकारों को समाप्त करना होता है और अधिकारों को प्राप्त करना होता है। अब यदि एक विधान परिषद् की यही अवधारणा है, तो मेरे विचार में अल्पसंख्यकों को संख्या के अनुसार समानुपातिक प्रतिनिधित्व से बांधना उचित नहीं होगा। इसका अर्थ यह होगा कि आप किसी अल्पसंख्यक वर्ग को सदा के लिए अल्पसंख्यक रहने पर ही मजबूर कर रहे हैं और उसे बहुसंख्यक वर्ग के कार्यों को प्रभावित करने के लिए आवश्यक शक्तियां नहीं देना चाहते।

  1. यदि मताधिकार को ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय बोर्डों तक ही सीमित कर दिया जाए तो क्या आप संतुष्ट होंगे?

डॉ. अम्बेडकर : ठीक है, मैं सचमुच वयस्क मताधिकार के लिए आग्रह करूंगा। मताधिकार अर्हता जितनी कम होगी, उतना ही अच्छा होगा। उस सिद्धांत के आधार पर मैं किसी भी न्यूनीकरण को स्वीकार करूंगा। परन्तु मैं निश्चय ही यह नहीं कहूंगा कि मैं उससे संतुष्ट हो जाऊंगा।

  1. तब आप वयस्क मताधिकार को आदिम जनजातियों, जरायम पेशा और पर्वतीय जनजातियों पर भी लागू करेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, मैं ऐसा सोचता हूँ।

  1. क्या आप करेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. क्या आप उन्हें वयस्क मताधिकार नहीं देना चाहेंगे और उनके लिए मनोनयन की व्यवस्था और स्वयं वयस्क मताधिकार लेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : मैं एक बात कहूं। जरायम पेशा जातियों को वयस्क मताधिकार देना ठीक नहीं रहेगा, क्योंकि अपने व्यवसाय के कारण वे ऐसे लोग हैं कि अपने समुदाय के हितों में ही अधिक रुचि रखते हैं। वे उन साधनों के बारे में भी ज्यादा सोच विचार नहीं करते, जिनके द्वारा वे अपनी रोजी - रोटी कमाते हैं, परन्तु मेरे विचार में आदिम जनजातियों को मताधिकार देने में कोई हर्ज नहीं है।

  1. क्या उन्हें मताधिकार दिया जाए या उनके हितों की रक्षा मनोनयन द्वारा की जाए?

डॉ. अम्बेडकर : किसी न किसी तरह उनकी रक्षा की जानी चाहिए। यह कैसे की