घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 203

186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

डॉ. अम्बेडकर : अस्पृश्यता के कारण।

  1. जब वह कहीं काम करता है, तो सभी जातियों के लोगों के साथ ही काम करता है?

डॉ. अम्बेडकर : ऐसी बात नहीं है। विभागों में जातिगत भेदभाव होता है। एक विभाग में काम करने वाले सभी लोग केवल दलित वर्गों के हैं और दूसरे विभाग में, उदाहरणार्थ बुनाई विभाग में, मुसलमान और सवर्ण हिन्दू हैं।

  1. क्या वे श्रमिक संघों में भी भाग लेते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, अब उन्होंने ऐसा करना शुरू कर दिया है।

  1. दलित वर्गों से उच्च जातियों के लोगों के साथ।

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. मैं आपसे यही जानता चाहता था। आपने दलित वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व संख्या के आधार पर मांगा है। हमारे पास एक दूसरा आधार है, जिसके बल पर दावे किए गए हैं। वह श्रम का आधार है। इस तरह अंर्तीविरोधी विभाजन होता है, क्योंकि जो व्यक्ति दलित है, वह मजदूर भी हो सकता है।

डॉ. अम्बेडकर : हमेशा तो नहीं, पर वह आमतौर पर मजदूर है।

  1. यह तो केवल शब्दों का खेल है। क्या मैंने ठीक कहा? मैं पूंजी और श्रम की बात कर रहा हूँ उस श्रम की जो बड़े उद्योगों में है, साधारण असंगठित श्रम की नहीं। मैं संगठित श्रम की बात कर रहा हूँ। आप इस समस्या से कैसे निबटेंगे? यदि आप एक ओर सामाजिक स्थिति के नाम पर प्रतिनिधित्व चाहते हैं और दूसरी ओर उद्योग के नाम, पर तो यह अंतर्विरोध होगा। आप इससे कैसे निबटेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : संगठित मजदूरों के लिए कोई व्यवस्था होगी और दलित वर्ग के अधिकांश लोग श्रमिक हैं।

  1. श्री हार्टस्हौर्न : डॉ. अम्बेडकर, मेरे विचार में आपने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि आप वयस्क मताधिकार के पक्ष में हैं। आपने अपने ज्ञापन के पृष्ठ 41 पर कहा है कि ‘‘सभा इससे संतुष्ट हो जाएगी कि यदि विधान परिषद् के लिए उसी आधार पर मताधिकार निश्चित कर दिया जाए, जिस आधार पर यह ग्रामीण क्षेत्रों में, ताल्लुका और स्थानीय बोर्डों के लिए है और प्रेसिडेंसी के शहरी क्षेत्रों के लिए 3 रुपये प्रतिमास किराया।’’ क्या आपने राय बनाई है या आपके पास कोई ऐसे आंकड़े हैं कि जिससे हमें पता चल सके कि उस योग्यता के आधार पर मताधिकार की सीमा कितनी होगी?

डॉ. अम्बेडकर : मैं यह बता दूं कि इस वक्तव्य के बारे में मैं भी संदेह में हूँ। इसे मैं स्वीकार करता हूँ। जो सूचना मैं छोटे शहरों में दलित वर्गों से एकत्र कर पाया हूँ, उससे मुझे लगता है कि वर्तमान ताल्लुक स्थानीय मताधिकार के कारण दलित वर्गों के कुछ वोटरों को मत देने का अधिकार प्राप्त होता है।

  1. मैं इस बारे में इतना नहीं सोच रहा हूँ। क्या आप बता सकेंगे कि यदि