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भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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वर्तमान मापदंड के स्थान पर इस मापदंड को अपनाया जाए, तो बंबई प्रेसिडेंसी में मतदाताओं की संख्या में कितनी वृद्धि हो जाएगी?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में मैं आपको इस बारे में निश्चित जानकारी नहीं दे सकता हूँ।

  1. क्या मैं उस सवाल पर फिर आ सकता हूँ, जो मेजर ऐटली ने आपसे पूछा था? मुझे पता चला है कि दलित वर्गों के लोग फैक्ट्रियों में अलग - थलग होकर करम करते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, अलग - थलग, होकर।

  1. उनके अपने ही शेड और अपने ही विभाग होते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : उनके अपने विभाग हैं, परंतु शेड कोई नहीं।

  1. जो भी हो, फैक्ट्री में उन्हें दूसरे मजदूरों से अलग रखा जाता है।

डॉ. अम्बेडकर : मैं इस बात को इस प्रकार कहूंगा कि कुछ विभागों में केवल दलित वर्गों के मजदूर काम करते हैं और कुछ विभाग ऐसे हैं, जहां उन्हें घुसने नहीं दिया जाता।

  1. कुछ काम ऐसे हैं, जो उन्हें नहीं करने दिए जाते?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, मिलों में।

  1. मेरे विचार से आपने कहा कि उन्हें बुनाई विभाग में नहीं जाने दिया जाता?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. यदि वे उसी श्रमिक संघ के सदस्य बन जाते हैं, तो क्या बुनाई विभाग के मजदूर उन्हें लेने से इन्कार कर देंगे?

डॉ. अम्बेडकर : वे उन्हें नहीं आने देंगे। मैं एक घटना का उल्लेख करना चाहता हूँ। हाल ही में बंबई की हड़ताल में मैंने यह मामला बड़े जोरशोर से उठाया था। मैंने श्रमिक संघ के सदस्यों से कहा कि यदि आप दलित वर्गों के लोगों के सभी विभागों में काम करने के अधिकार को नहीं मानते हैं, तो मैं उनसे हड़ताल से नाता तोड़ देने के लिए कहूंगा। बाद में वे काफी आनाकानी के बाद इसे अपनी मांगों में शामिल करने के लिए तैयार हो गए और जब उन्होंने इस मांग को मिल-मालिकों के सामने रखा, तो मिलमालिकों ने उन्हें ठीक ही धमकाया और कहा कि यदि यह अन्याय है, तो निश्चित रूप से वे इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

  1. क्या यह सिर्फ इतनी सी बात नहीं है कि मालिक सस्ते मजदूर चाहते हैं और आर्थिक कारणों से केवल दलित वर्गों के मजदूरों को ही कुछ विभागों में रखना चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं, यह अस्पृश्यता है।

  1. क्या इस स्थिति में ऐसा हो सकता है? अच्छा वेतन पाने वाले भारतीय अपने