घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 206

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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  1. दलित वर्गों के लोगों को प्रांत के राजस्व पर प्रभार की आवश्यकता के बिना स्कूलों और कालिजों में दाखिल कराया जाना क्यों संभव नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : आप इसका कारण उन लोगों से पूछें जो इंकार करते हैं?

  1. किससे इंकार करते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : उनको दाखिला देने से।

  1. स्कूलों और कालिजों में?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या आपको पता है कि बंबई नगरपालिका ने अब एक नियम बना दिया है?

डॉ. अम्बेडकर : और आपको पता होगा कि बंबई में इसके विरुद्ध सभा हुई थी।

  1. किसी वर्ग द्वारा विरोध हो सकता है, परन्तु नगरपालिका ने वे सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं।

डॉ. अम्बेडकर : देखते हैं कि अगले चुनाव में इस पर कहां तक टिकते हैं।

  1. परन्तु उन्होंने ऐसा कर दिया है। क्या आप जानते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. चेयरमैन : क्या हम जान सकते हैं कि वह कौन सी विरोध सभा है, जिसका उन्होंने उल्लेख किया है?

डॉ. अम्बेडकर : स्थिति इस प्रकार है। अब तक बंबई शहर में बंबई नगरपालिका के दलित वर्गों के लिए अलग स्कूल थे। अब अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की योजना के अंतर्गत मितव्ययता के उपाय के रूप में नगरपालिका स्कूलों की संख्या सीमित करने और दलित वर्गों के इधर उधर बिखरे बच्चों को सवर्ण हिन्दुओं के स्कूलों में भर्ती कराने के लिए बाध्य हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए पानी और अन्य सुविधाओं के लिए कुछ करना स्वाभाविक है। प्रश्न यह उठा कि क्या पीने के पानी की अलग व्यवस्था की जाए या अस्पृश्यों के लिए सवर्ण हिन्दुओं से अलग बर्तन हों। पालिका ने यह कहते हुए एक संकल्प पारित किया कि हम अपने स्कूलों में अस्पृश्यता को मान्यता नहीं दे सकते और उन्होंने परिपत्र जारी कर दिया कि उनके स्कूलों में पीने के लिए अलग बर्तन नहीं होने चाहिएं। यह विरोध सभा बंबई के एक महत्वपूर्ण हिन्दू नेता के सभापतित्व में हुई थी, जो वहां पर की जा रही थी, क्योंकि उसमें इस बात पर विरोध प्रकट किया गया था कि उस प्रकार की समान व्यवस्था हिन्दू धर्म के विरुद्ध है।

  1. श्री प्रेमचंद : क्या आप जानते हैं कि अहमदाबाद की मिलों के बुनाई विभागों में दलित वर्गों के लोग कार्य कर रहे हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे इसका पता नहीं।

  1. मैं आपको बता सकता हूँ कि वे वहां पर हैं।