घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 207

190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

डॉ. अम्बेडकर : यहां फिर मैं यह बताना चाहूंगा कि शायद वहां केवल दलित वर्गों के ही लोग कार्यरत हैं। मैं उस स्थिति को समझ सकता हूँ, जिसमें उदाहरणार्थ कई करघे केवल दलित वर्गों के लोगों के लिए ही निश्चित कर दिए गए होंगे। आजकल कई मिलों में यह प्रस्ताव है कि दलित वर्गों के मजदूरों को ही पूरा बुनाई विभाग सौंप दिया जाए, पर ऐसा नहीं हो सकता कि उन्हीं में से कुछ दलित वर्ग के लोग हों और कुछ सवर्ण हिन्दू हों।

  1. कठिनाई दोनों को एक साथ रखने में है।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. माननीय हरिसिंह गौड़ : संवैधानिक सुधार की सामान्य योजना के बारे में आपके संस्थान का क्या विचार है? इस विषय पर आपने कोई मत बनाया है या नहीं?

डॉ. अम्बेडकर : मैं आपको इस बारे में बताता हूँ। दलित वर्गों की संवैधानिक प्रश्नों में कोई विशेष रुचि नहीं है। सरकार कोई भी हो वे गारंटी और संरक्षण प्राप्त करना चाहते हैं, जिनकी उन्हें आवश्यकता है। इसलिए मेरे विचार से उनका सरकार की किसी भी प्रणाली के बारे में कोई दृष्टिकोण नहीं है, चाहे वह प्रांतीय सरकार हो अथवा केन्द्रीय। परन्तु दलित वर्गों का एक सदस्य होने के नाते मेरे अपने व्यक्तिगत विचार हैं, भले ही मेरे विचार दलित वर्गों के विचारों से मेल न खाते हों। इसीलिए मेरे ज्ञापन में संविधान के बारे में कोई जिक्र नहीं है।

  1. मुझे इसका पता है और इसीलिए मैंने आपसे यह प्रश्न पूछा कि आपके व्यक्तिगत विचार क्या हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जहां तक प्रांतीय सरकार का प्रश्न है, मैं प्रांतीय स्वायत्तता के पक्ष में हूँ।

  1. सशर्त अथवा बिना शर्त।

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में विधि और व्यवस्था के हस्तांतरण में कुछ रक्षोपाय होने चाहिएं। ऐसी बात नहीं है कि मैं विधि और व्यवस्था के हस्तांतरण पर आपत्ति करता हूँ। मैं हस्तांतरण के पक्ष में हूँ। फिर भी मैं चाहता हूँ कि कुछ रक्षोपाय होने चाहिएं। ये रक्षोपाय कैसे होने चाहिएं, उनके बारे में निश्चित रूप से मैं कुछ नहीं कह सकता हूँ। परन्तु उस संबंध में कुछ रक्षोपाय अवश्य होने चाहिएं। इसके अलावा मैं (व्यक्तिगत रूप से) पूर्ण प्रांतीय स्वायत्तता के पक्ष में हूँ।

  1. केन्द्र सरकार के बारे में आपके क्या विचार हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में वहां पर द्वैध शासन होना चाहिए।

  1. क्या आप वयस्क पुरुष और महिला मताधिकार के पक्ष में हैं?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या आप इसे व्यावहारिक समझते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : बिल्कुल व्यावहारिक।