भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष
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- क्या आप समझते हैं कि लोगों में इतनी राजनीतिक चेतना आ गई है कि वे अपने इस राजनीतिक मताधिकार का उपयोग अपने समुदाय के लाभ के लिए कर सकते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : केवल दलित वर्गों के बारे में मैं जोर देकर कहता हूँ कि बंबई प्रेसिडेंसी में दलित वर्गों के लोग अपने मताधिकार का प्रयोग बहुत बुद्धिमत्तापूर्वक करेंगे। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि अस्पृश्यता का कलंक उनको पल - पल सताता है और यह सोचते हुए कि राजनीतिक शक्ति ही उनके लिए संकटमोचक है, मैं पूरी शक्ति से इस बात को कह सकता हूँ कि दलित वर्ग का मतदाता बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से मत देगा।
- क्या आप ऐसा नहीं सोचते कि अन्य देशों की तरह यहां भी जो लोग कर नहीं देते हैं, उन्हें राजनीतिक अस्तित्व तथा शक्ति सौंपे जाने से उन लोगों का शोषण नहीं होगा जो पहले ही भारी करों से दबे हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मेरे ख्याल से ऐसा ही होना चाहिए। मुझे इसमें कोई गलती नजर नहीं आती।
- आपको करदाता वर्ग के शोषण में कोई गलती नजर नहीं आती? क्या यह आपका ही विचार है या उस संगठन का भी, जिसका आप प्रतिनिधित्व करते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : यह मेरी अपनी राय है। संगठन ने यहां इस बारे में कुछ नहीं कहा है।
- क्या आप सोचते हैं कि आयोग के समक्ष यह विचार प्रस्तुत करके आप अपने संगठन की आम राय प्रकट कर रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकर : मैं सोचता हूँ कि यह सभी गरीब तबकों का विचार होगा।
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- श्री हरिसिंह गौड़ : चेयरमैन के एक प्रश्न के उत्तर में आपने कहा कि दलित वर्गों को हिन्दू समुदाय से भिन्न एक विशिष्ट समुदाय माना जाए। क्या आप यह केवल चुनाव के प्रयोजनों के लिए चाहते हैं या सभी प्रयोजनों के लिए?
डॉ. अम्बेडकर : वास्तव में वे सभी प्रयोजनों के लिए विशिष्ट हैं?
- क्या आप दलितों को वास्तविक हिन्दू कहेंगे?
डॉ. अम्बेडकर : नामों के बारे में मैं इतनी परवाह नहीं करता। जब तक मैं हिन्दू समुदाय से बाहर हूंँ तो मैं अपने आपको हिन्दू कहूं या गैर - हिन्दू कहूं, इससे क्या फर्क पड़ता है?
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- दुनिया में इससे पूरा फर्क पड़ता है। यदि आप . . . हिन्दू धर्म से बाहर हैं, तो आप पर हिन्दू कानून लागू नहीं होंगे। उदाहरणार्थ, आप 1923 के अधिनियम 30 के