192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
तहत विवाह नहीं कर सकते, जिसने जहां तक विवाह संबंधी कानून का प्रश्न है, एक हिन्दू और एक महार तथा स्पृश्य और अस्पृश्य के बीच सभी जातिगत भेद पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यदि आप उस समुदाय से बाहर जाते हैं, उस सामाजिक व्यवस्था के बाहर जाते हैं और अपने आपको गैर - हिन्दू कहते हैं, तो आप हिन्दू कानून की सीमा से बाहर होंगे?
डॉ. अम्बेडकर : हो सकता है।
- तब आप किस कानून के तहत आएंगे?
डॉ. अम्बेडकर : हम पर हिन्दू कानून लागू होता है, जैसे खोजाओं पर जो मुसलमान हैं, परन्तु जहां तक संपत्ति का संबंध है, वे हिन्दू कानून की सीमा में रहना चाहते हैं।
- और आप 1923 के अधिनियम 30 के अंतर्गत हैं, आप हिन्दू कानूनों के अंतर्गत हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं कह सकता कि शादी के बारे में दलित वर्गों का क्या विचार है।
- अब क्या आप अपने ज्ञापन पर आएंगे? आपने पृष्ठ 39 पर क्या कहा है और आपने मेरे मित्र कीका भाई के प्रश्न के उत्तर में दोहराया है कि ‘समुदाय की स्थिति का अर्थ है कि उसे सामाजिक संघर्ष में उसके आत्मरक्षा का अधिकार हो। यह अधिकार स्पष्टतः उस समाज की शैक्षिक और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा।’
डॉ. अम्बेडकर : ठीक है।
- उस सिद्धांत का प्रतिफल है कि जिस समुदाय की स्थिति जितनी नीची है उसको अन्य समुदायों की अपेक्षा उतना ही अधिक चुनाव संबंधी लाभ मिलना चाहिए, क्या आप इस अंतिम वाक्य को पिछले दो वाक्यों का युक्तिसंगत निष्कर्ष समझते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- आप इसे युक्तिसंगत निष्कर्ष मानते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, बिल्कुल।
- ------ मैं आपका ध्यान उस तथ्य की ओर दिलाना चाहता हूँ, जो आपने कहा था कि ‘‘पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग के अतिरिक्त सभा महसूस करती है कि इसे देश के संविधान में खंड़ों के समावेश की मांग भी करनी चाहिए। खंडों में कुछ ऐसी बातें लिखी हैं जैसे ‘प्रत्येक दलित वर्ग’ को यह अधिकार हो कि उनमें से ही एक विशेष पुलिस इंसपेक्टर की नियुक्ति की जाए।’’
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- क्या आप यह उम्मीद करते हैं कि संसद के अधिनियम में इस आशय का एक खंड होना चाहिए कि भारत में दलित वर्गों का उनमें से ही प्रत्येक जिले में एक