घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 210

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

पुलिस इंस्पेक्टर होना चाहिए?

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डॉ. अम्बेडकर : मैं इसमें कुछ विचित्रता नहीं पाता।

  1. मान लीजिए यदि सभी समुदायों के बारे में एक उस आशय का प्रावधान कर दिया जाए (क्योंकि यदि आपको कतिपय संवैधानिक गारंटी मिल जाती है तो इसका अर्थ यही होगा कि दूसरे समुदायों का भी वैसा ही अधिकार मिले) तो आप सभी सरकारी पदों को और अन्य चीजों को विभिन्न समुदायों में वितरित कर देंगे और क्या आप भारत के लिए ऐसा ही संविधान चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मैं यह नहीं जानता। मैं तो केवल दलित वर्गों के लिए बोल रहा हूँ। क्या मैं एक बात स्पष्ट कर दूं?

  1. क्या मैं अपना वाक्य पूरा कर लूं? यह एक ऐसी बात है, जिसके परिणामस्वरूप आपके दिमाग में कोई आशंका नहीं उठती?

डॉ. अम्बेडकर : इसके पहले कि आप कुछ और कहें मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूँ। मेरे विचार में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए। मैं नहीं समझता कि हमें एक ऐसे समुदाय को जिसके लोगों की संख्या कम है, राजनीतिक प्रयोजनों के लिए आवश्यक रूप से एक अल्पसंख्यक समुदाय मान लेना चाहिए। एक ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय जिसे सताया जाता है अथवा जिसको बहुसंख्यकों द्वारा अधिकारों से वंचित रखा जाता है, वह ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय होगा, जिसे राजनीतिक प्रयोजनों के योग्य माना जायेगा।

  1. अन्य देशों में जहां पर ऐसे अल्पसंख्यक हैं, वहां प्रावधान किए गए हैं, कभी-कभी वहां अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए एक मंत्री होता है। क्या आपने इस बारे में सोचा?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. मान लिया हम आपको संरक्षण देते हैं - यह किसी भी प्रकार का हो सकता है और अगर मैं यह कहूं कि ख्. . .,

डॉ. अम्बेडकर : आपकी बात काटने के लिए क्षमा चाहता हूँ। मैंने देखा है कि शांति के बाद विभिन्न यूरोपीय देशों में जिनमें अधिकांश स्लावोनिक राष्ट्र भी शामिल हैं, जो नए संविधान बनाए गए हैं, उनमें यह सिद्धांत बड़े पैमाने पर अपनाया गया है। मैंने इस विषय पर कुछ विशेष ध्यान दिया है।

  1. लार्ड बर्नहम : क्या उस सिद्धान्त पर अमल हुआ है?

डॉ. अम्बेडकर : और उसे संविधान का अंग बना दिया गया है।

  1. क्या व्यवहार में उस पर अमल भी हुआ है?

डॉ. अम्बेडकर : व्यवहार में अमल हुआ है और खास बात यह है कि यदि अल्पसंख्यक यह अनुभव करें कि गारंटी पूरी नहीं की गई है, तो उन्हें लीग ऑफ