घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 213

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

  1. आप बीस साल पहले की स्थिति पर दृष्टिपात करें और फिर अपना विचार बताएं?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. मैं दो-तीन चीजें जानना चाहता हूँ। सबसे पहली बात यह है कि जहां तक हिन्दुओं के मंदिरों में दलित वर्गों के प्रवेश का संबंध है, इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। यह तो केवल धार्मिक व्यवहार और उपदेश का मामला है। मैं इसकी आलोचना नहीं करता परन्तु कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं। इस संबंध में कोई अंतर नहीं हुआ है।

  1. मैं इस प्रेसिडेंसी की दो या तीन निश्चित बातें जानना चाहता हूँ। जिलों में आपने हमें बताया है कि दलित वर्ग, जो अस्पृश्य हैं, अपनी अलग जगहों पर रहते हैं। निश्चय ही हमने इसे कई बार देखा है। यदि कोई हिन्दू गांव है, तो वे उसके एक कोने में रहते हैं और कभी - कभी अपनी ही बस्ती में रहते हैं। जहां तक उनके आम जातियों के बीच रहने का सवाल है, क्या पिछले बीस वर्षों में कोई परिवर्तन हुआ है?

डॉ. अम्बेडकर : कोई परिवर्तन नहीं।

  1. हमने कुछ दिन पहले कुछ गांवों को देखा। हमें पता चला कि वे नदी से पानी ले सकते हैं, परन्तु ऐसे भी दूसरे गांव हैं, जो कुओं पर निर्भर हैं।

डॉ. अम्बेडकर : नदियों के मामले में भी वे नदी के एक निश्चित भाग से ही पानी ले सकते हैं। उनके लिए भी नदी का एक भाग निश्चित कर दिया जाता है।

  1. आप यह कहना चाहते हैं कि दलित वर्गों के लोग ऐसे स्थानों से पानी लेंगे, जो सवर्ण जातियों के पानी लेने के स्थानों से नीचे की ओर हैं।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. अब हम उन गांवों के मामलों को लेते हैं, जो कुओं पर निर्भर हैं। यह आम बात है?

डॉ. अम्बेडकर : हां, यह आम बात है।

  1. मैं यह जानना चाहता हूँ और मुझे आशा है कि आप मुझे स्पष्ट रूप से बताएंगे कि क्या इस संबंध में पिछले 20 वर्षों में कोई सुधार हुआ है?

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं।

  1. आपका ध्यान इस ओर दिलाया गया है कि इस विषय पर संकल्प पारित किए गए हैं?

डॉ. अम्बेडकर : हां, केवल संकल्प।

  1. बताया गया है कि किसी समय अस्पृश्यता इतनी बढ़ गई थी कि उनके छूने से तो क्या कभी - कभी उनकी छाया पड़ने से भी सवर्ण हिन्दू अपवित्र हो जाते थे?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. क्या इस संबंध में कोई सुधार हुआ है?