घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 215

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

में नहीं चढ़ने दिया गया।

  1. जब आप दो साल पहले की बात करते हैं, तो मुझे ऐसा लगता है कि यह केवल अपवाद है, कोई नियम नहीं?

डॉ. अम्बेडकर : उदाहरणार्थ मैंने देखा है कि जब मैं बी.बी. एंड सी.आई. रेलवे से सफर करता था, तो मैंने ऐसे सैकड़ों मामले देखे, जब यात्री दलितों को डिब्बों में घुसने से रोकते थे।

  1. माननीय हरिसिंह गौड़ : आपने एक भंगी का मामला उठाया। क्या आपको विश्वास है कि क्योंकि वह ढंग से कपड़े नहीं पहने था, इसलिए उसे ट्राम में नहीं चढ़ने दिया गया।

डॉ. अम्बेडकर : मुझे इसका पता नहीं।

  1. जब एक आदमी ट्राम में चढ़ता है, तो उससे उसकी जाति नहीं पूछी जाती। उससे केवल यह पूछते हैं कि भाड़ा दिया या नहीं। क्या ऐसी बात नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : परन्तु लोग उसे आसानी से पहचान सकते हैं।

  1. यह उसके कपड़ों की वजह से?

डॉ. अम्बेडकर : परन्तु जब यह पता चल जाए कि कोई व्यक्ति दलित वर्ग का है, तो उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है।

  1. जाति के प्रश्न के अलावा पहनावे का भी सवाल है?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, लेकिन कुछ दलित बहुत अच्छे कपड़े पहनते हैं।

  1. बंबई प्रेसिडेंसी में ऐसा कुछ नहीं है कि लोग दलित वर्गों की छाया से भी अपवित्र हो जाते हां?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, परन्तु कोंकण और काठियावाड़ के कुछ भागों में अभी भी ऐसा ही होता है।

  1. यह कम हो रहा है?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।

  1. जहां तक अहमदाबाद में अम्बालाल सरलाल स्कूल का संबंध है, क्या उनकी बहन ने वह स्कूल दलित वर्गों के लिए नहीं चलाया है?

डॉ. अम्बेडकर : वही एक अपवाद है।

  1. क्या स्कूल सरकारी खर्च से दलितों के लिए नहीं चलाया जा रहा है?

डॉ. अम्बेडकर : इसका मुझे पता नहीं, परन्तु मैं जानता हूँ कि वह महिला दलित वर्गों के उत्थान में रुचि ले रही है।

  1. मैं समझता हूँ, यह एक अपवाद है?

डॉ. अम्बेडकर : हां, यह बिल्कुल अपवाद है।