घ. भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष - Page 216

भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष

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  1. डॉ. सुहरावर्दी : सामाजिक बहिष्कार और अत्याचारों की घटनाओं को जिनका आपने अभी जिक्र किया है, क्या आप ऐसा नहीं समझते हैं कि आम चुनाव में आपके समुदाय के लोगों को डरा - धमका कर मतदान केन्द्रों से भगा दिया जाएगा?

डॉ. अम्बेडकर : जी हां, ऐसा हो सकता है।

  1. एक आशंका यह भी है कि उच्च जाति के हिन्दू वहां मतदान के लिए आएं ही नहीं जहां दलित वर्ग के लोग वोट डालें?

डॉ. अम्बेडकर : ऐसा संभव है। यह कहना मुश्किल है कि क्या हो सकता है। उदाहरण के लिए कुछ मामले हैं, जहां जिला बोर्डों में सवर्ण हिन्दू सभा से चले गए, क्योंकि दलित वर्गों के लोग मेज - कुर्सियों पर बैठने की मांग कर रहे थे।

  1. इन हालातों में क्या आप ऐसा नहीं सोचते कि यह बेहतर होगा कि आप पृथक निर्वाचक - मंडल की मांग करें, क्योंकि इसका अर्थ भी पृथक निर्वाचक - मंडल ही होगा, भले ही आप सामान्य निर्वाचन क्षेत्र में सीटें आरक्षित करा लें।

डॉ. अम्बेडकर : जी हां।

  1. राव बहादुर राजा : मेरे मित्र माननीय हरिसिंह गौड़ ने दलित वर्गों के पहनावे के बारे में जो प्रश्न पूछा, उसके संदर्भ में क्या नाई ने आपकी हजामत बनाने से इंकार कर दिया, क्योंकि आप ठीक - ठाक कपड़े नहीं पहने थे?

डॉ. अम्बेडकर : नहीं, ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि मैं दलित वर्ग से संबंधित हूँ।

  1. उन कपड़ों के कारण नहीं, जो आपने पहिने हुए थे?

डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं।

  1. एक अन्य सदस्य द्वारा पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या गांव के किसी दलित वर्ग के व्यक्ति के लिए बस मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर करना आसान काम है, क्योंकि उसने उसे बस में नहीं चढ़ाया था?

डॉ. अम्बेडकर : यह संभव नहीं।

  1. मैं समझता हूँ कि आप दलितों के उत्थान में बहुत रुचि ले रहे हैं। इस प्रचार कार्य में उच्च जातियों के लोगों की सहायता के संबंध में आपका क्या अनुभव है? क्या वे आपकी इसलिए सहायता करते हैं कि वे दलित वर्गों के लिए अधिक सफाई आदि की आवश्यकता पर बल देना चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : दुर्भाग्य से इस मामले में मेरा अनुभव बहुत कटु है। दलित वर्गों को उनकी कतिपय अस्वच्छ आदतों के कारण पास नहीं फटकने दिया जाता। यही इल्जाम ऊंची जातियों के लोग लगाते हैं। कहा जाता है कि दलित वर्गों के लोग मृत पशुओं का मांस खाते हैं और वे साफ सुथरे नहीं रहते। पिछले दो वर्षों में इस प्रेसिडेंसी में मैंने दलित वर्गों को साफ - सुथरा रहने और गंदी आदतों को छोड़ने हेतु उन्हें राजी करने के लिए एक अभियान आरंभ किया। यह मेरा दुर्भाग्य था कि सारे सवर्ण हिन्दू मेरे विरुद्ध हो गए, जब कि ऐसे मामले में मैं उनसे पूरे सहयोग की उम्मीद कर रहा था। परन्तु