भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष
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डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में यदि मैं बंबई के किसी मंदिर में जाने की कोशिश करता, तो मेरे साथ भी ऐसा ही व्यवहार होता।
- क्या आप हमें यह बताने की कृपा करेंगे कि दलित वर्गों के लोगों को किस प्रकार की चिकित्सा सहायता मिल रही है?
डॉ. अम्बेडकर : डिस्पेंसरियों में उनका प्रवेश वर्जित है, जब तक कि मामला बहुत गंभीर न हो, जैसे डिस्पेंसरी में यदि दलित वर्गों के लोगों को प्रवेश न करने देने की बात उच्चाधिकारियों तक पहुंच जाएगी। दलित वर्गों के लोगों को डिस्पेंसरियों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता।
- चेयरमैन : मेरे विचार से आप छोटे शहरों की डिस्पेंसरियों की बात कर रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां। सरकारी डिस्पेंसरियों की।
- ये डिस्पेंसरियां चिकित्सा प्रशासन मंत्री के विभाग में हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- मेरे विचार से मंत्री के आदेश हैं कि ये डिस्पेंसरियां हरेक के लिए खुली हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- परन्तु आप कहते हैं कि छोटे शहरों में ऐसी स्थिति नहीं है?
डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं।
डॉ. सोलंकी : रूढि़वादी हिन्दू चिकित्सक सदा दलित वर्ग के मरीज को देखने पर आपत्ति करते हैं। गुजरात में ऐसे उदाहरण हैं कि चिकित्सा न मिलने के कारण लोग मर गए। मुझे ऐसी अनेक घटनाएं पता हैं, जिनमें डाकटरों ने निमोनिया से पीडि़त मरीज को छूने से इंकार कर दिया। डाक्टर थर्मामीटर को पकड़ा देते हैं, जो उसे थामना तक नहीं जानता। मुसलमान थर्मामीटर मरीज को पकड़ा देता है, यह सत्य है और ऐसा हुआ है।
- महत्वपूर्ण बात यह है और मैं इसे फिर कहता हूँ कि हमें वास्तविक स्थिति जाननी चाहिए। ऐसी बातें यदा कदा होती होंगी। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या वह किसी एक विशेष डाक्टर की आपत्ति के कारण अपवाद स्वरूप होती हैं या आपके विचार में ऐसी बातें हर रोज होती हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जो डाक्टर रूढि़वादी हैं, वे ऐसा करते हैं।
- इस बारे में कठिनाई यह है कि, जो डाक्टर एतराज करते हैं, वे अपने धार्मिक विचारों के कारण करते हैं?
डॉ. सालंकी : जी हां।
- राव बहादुर राजा : क्या ये तथ्य संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाए गए हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।