202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
- उन्होंने क्या कार्यवाही की?
डॉ. अम्बेडकर : मंत्री जी ने जो उत्तर दिया वह यह था कि बेहतर होगा कि हम समझाने बुझाने की नीति अपनाएं। उन्होंने यही शब्द इस्तेमाल किए थे।
चेयरमैन : राव बहादुर, क्या आप हमारे लिए भी ऐसा करेंगे? हमने इसके विभिन्न पहलुओं को सुना है और मैं तथ्य जानना चाहता हूँ। इस प्रान्त में साधारण सरकारी स्कूलों में दलित वर्गों के बच्चों की स्थिति क्या है। क्या आप मेरे लिए साक्षी से यह बात पूछेंगे?
- राव बहादुर राजा : क्या आप हमें यह बतायेंगे कि दलित वर्गों के छात्रों के प्रति स्कूल मास्टरों, शिक्षा विभाग और स्कूलों के प्रबंधकों का क्या रवैया रहता है?
डॉ. अम्बेडकर : जब डॉ. परांजपे इस प्रेसिडेंसी में शिक्षा मंत्री थे, तो उन्होंने एक परिपत्र जारी किया था कि दलित वर्गों के छात्रों को सभी स्कूलों में प्रवेश दिया जाए। परन्तु हमारा अनुभव यह है कि वह परिपत्र बिल्कुल लागू ही नहीं किया गया। यह सच है कि जनशिक्षा निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परिपत्र लागू हो गया है, परन्तु मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ, क्योंकि यह बात सत्य नहीं है। अभी कुछ दिन पहले पूना में एक घटन हुई। देऊ में दलित वर्ग के बच्चों को दाखिला नहीं दिया गया और जब उन्होंने इसके लिए आग्रह किया, तो गांव वालों ने दलित जातियों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
- चेयरमैन : ज्ञापन में उस रिपोर्ट का जिक्र है?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, जैसा मैंने कहा सच्चाई नहीं है। मैं उससे सहमत नहीं हूँ।
- राव बहादुर राजा : मुझे श्री ग्रीफिथ से पता चला कि उनके विचार में दलित वर्गों को पुलिस विभाग में इसलिए नहीं लिया जाता है कि पुलिस को कई घरों की जाकर तलाशियां लेनी होती हैं और गिरफ्तारियां भी करनी होती हैं। तर्क के लिए मान लें कि यह सही है तो क्या इसी तरह दलित वर्गों के लोगों की अन्य अधीनस्थ और प्रांतीय सेवाओं में भर्ती के संबंध में ये आपत्ति नहीं उठायी जाएगी?
डॉ. अम्बेडकर : देखिएगा, कई आपत्तियां उठाई गई हैं।
- आप स्थानीय विधान परिषद् के सदस्य हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- आपका अपने समुदाय के प्रति स्थानीय परिषद् के ऊंची जातियों के सदस्यों के व्यवहार के बारे में क्या अनुभव हैं?
डॉ. अम्बेडकर : यह नहीं कहा जा सकता कि वे दलितों के पक्ष में हैं।
- आपके प्रांतों में आपके समुदाय के सदस्यों के प्रति सरकार का क्या रवैया है?
डॉ. अम्बेडकर : बहुत उदासीन।
- मेरे विचार से इस प्रेसिडेंसी में आनरेरी बेंच मजिस्ट्रेटों की अदालतें हैं। क्या इन बोर्डों में दलित वर्गों के कोई सदस्य हैं?