भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष
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डॉ. अम्बेडकर : कोई नहीं है। हम कोशिश कर रहे हैं कि मजिस्ट्रेटों की कुछ बैंचों में हमारे लोग हों, परन्तु यह संभव नहीं हुआ है। सम्मेलन के लिए संभवतः रुचिकर होगा यदि मैं इस संबंध में उस पत्र को पढ़कर सुनाऊं, जो खानदेश के जिले के कलक्टर ने दलित वर्ग के उस सदस्य को लिखा था, जिसने बैंच में नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। पत्र में वे कारण भी बताए गए हैं, जिनकी वजह से उस व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया गया है। पत्र इस प्रकार है : ‘‘कलक्टर को दलित वर्गों की महत्वाकांक्षाओं से बहुत सहानुभूति है और वह विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों में भी श्री मेघे द्वारा किए गए अच्छे कार्य की सराहना करते हैं, परन्तु उनकी राय में वह समय अभी नहीं आया है, जब दलित वर्गों के किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेटों के बैंच में स्थान दिया जाए और जब तक सरकार इस प्रेसिडेंसी में दलित वर्गों की महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप कोई घोषणा नहीं करती, जब तक वह इस प्रकार की नियुक्ति करने की सिफारिश करने में असमर्थ है। ‘‘यह पत्र 25 सितम्बर, 1928 का है।
- मुझे विश्वास है कि आप मेरी इस बात से सहमत होंगे कि इन निकायों में नियुक्तियों का समुदायों की प्रगति से कोई संबंध नहीं है?
डॉ. अम्बेडकर : कोई संबंध नहीं है।
- एक मात्र बात यह है कि क्या कोई व्यक्ति जिम्मेदारी की भावना के साथ अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन कर सकता है?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- लार्ड बर्नहम : मेरे विचार में आप कहना चाहते हैं कि दलित वर्गों के हितों की रक्षा करने के सभी उपायों में से आप सर्वसुलभ मताधिकार को सर्वोत्तम समझते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : मैं विधान परिषद् में पर्याप्त प्रतिनिधित्व चाहूंगा।
- मेरे विचार में आप सर्वसुलभ मताधिकार के पक्ष में हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां।
- यदि वह आपको नहीं मिलता है, तो क्या आप पृथक निर्वाचक - मंडलों की मांग करेंगे? मान लीजिए आपको दोनों में कोई नहीं मिलता है, तो क्या आप तब भी मनोनयन के सिद्धान्त के पक्ष में हैं?
डॉ. अम्बेडकर : नहीं, मैं आग्रह करूंगा कि हमारा प्रतिनिधि चुना जाए।
- यदि आप प्रस्तावित शर्तों पर चुनाव नहीं करा सकते, तो आप मताधिकार को पसंद करेंगे?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां।
- चेयरमैन : आपने चुनाव प्रणाली के माध्यम से दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व को तरजीह दिए जाने के लिए कहा है। क्या आपको विश्वास है कि यदि चुनाव के तरीके को अपनाया गया, तो क्या आप उन लोगों को निर्वाचित कर लेंगे, जो वास्तव