भारतीय सांविधिक आयोग के समक्ष 205
डॉ. अम्बेडकर : जी, हां। वर्तमान परिस्थितियों में यही बात है।
- सरदार मजूमदार : क्या आपको मालूम है कि दलित वर्गों के संतों का सभी वर्ग आदर करते हैं और ऊंची जातियों के लोग उनके आगे वैसे ही सिर झुकाते हैं, जैसे ऊंची जाति के संतों के आगे?
डॉ. अम्बेडकर : जहां तक मैं जानता हूँ, वह केवल एक ही संत हैं।
- पर क्या वे ऐसा करते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, जैसा कि मुस्लिम पीरों के आगे।
- क्या आप जानते हैं कि वरकारी पंथ में अर्थात् पंढरपुर में भगवान बिठोबा के भक्त अस्पृश्यता को नहीं मानते?
डॉ. अम्बेडकर : यह बिल्कुल गलत है।
- क्या आप इससे सहमत हैं कि पिछले 25 वर्षों में दलित वर्गों के प्रति व्यवहार में भारी परिवर्तन हुआ है कि उच्च वर्ग के शिक्षित लोग अस्पृश्ता के कलंक को धोने और उनके साथ निस्संकोच मेल मिलाप के प्रयत्न कर रहे हैं और धीरे - धीरे दलितों की दशा सुधर रही है और आम शिक्षित लोगों का उनके प्रति व्यवहार बदल रहा है?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, ठीक है, लेकिन सहानुभूति केवल शब्दों तक ही सीमित है और वह व्यवहार में प्रकट नहीं होती।
- क्या आप जानते हैं कि लगभग सभी गांवों में दलित वर्गों के लोगों के लिए कुएं अलग ही हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं।
- क्या ऐसे कुएं नहीं है?
डॉ. अम्बेडकर : हर गांव में नहीं।
- दलित वर्ग कौन से हैं? क्या आप उनका नाम बताएंगे?
डॉ. अम्बेडकर : जनगणना में हैं।
- क्या मांग और महार जातियों के बीच विवाह होते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : नहीं, सवर्ण जातियों ने यह जहर सब जगह फैला दिया है।
- क्या वे एक साथ भोजन कर लेते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : जी हां, आजकल कर लेते हैं, एकता का अभियान चल रहा है और अब तो एक मामला मांग और महारों के बीच शादी व्यवहार का सामने आया है।
- क्या मेरे निर्वाचन - क्षेत्र में दो इनामदार दलित वर्गों के नहीं हैं?
डॉ. अम्बेडकर : मुझे पता नहीं।