च
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा
दलित वर्गों संबंधी भारतीय मताधिकार कमेटी
( लोथियन कमेटी ) को
(
)
मैं सहमत हूँ कि दलित वर्ग शब्द को केवल अस्पृश्यों तक सीमित रखा जाए।
वास्तव में मैंने स्वयं किया है कि उन सभी को अस्पृश्यों से अलग रखा जाए, जिनमें
उसी प्रकार की चेतना नहीं हो सकती, जैसे कि उन लोगों में होती है, जो अस्पृश्यता
की प्रणाली में निहित सामाजिक विभेद के शिकार होते हैं। अतः इस बात की संभावना
रहती है कि वे अस्पृश्यों का शोषण अपने स्वार्थों के लिए करें। मैंने कसौटी नं. 7 और
8 के उपयोग पर भी कोई आपत्ति नहीं की है, जिनका उल्लेख अस्पृर्श्यें वर्गों का पता
लगाने के लिए कमेटी की रिपोर्ट में किया गया है। लेकिन जैसा कि मैं पूछता हूँ,
अलग - अलग लोग अलग - अलग तरीकों से उन्हें लागू करते हैं अथवा उनकी विभिन्न
प्रकार से व्याख्या करते हैं। मैं यह जरूरी समझता हूँ कि इस मामले के बारे में अपने
दृष्टिकोण को स्पष्ट कर दूं।
पहली बात तो यह है कि कुछ क्षेत्रों में आग्रह किया गया है कि अस्पृश्य वर्गों
का पता लगाने के लिए, जो भी कसौटियां लागू की जाएं, वे निश्चय ही समूचे भारत
में समान रूप से लागू की जाएं। इस सिलसिले में मैं कहना चाहता हूँ कि इस प्रकार
के मामले में यह उचित नहीं होगा कि समूचे भारत पर एक सी कसौटी या कसौटियों
को लागू किया जाए। भारत एक अखंड समरूप देश नहीं है। वह एक महाद्वीप है।
विभिन्न प्रांतों में अति विविधता वाली परिस्थितियां हैं और वे किसी जाति अथवा भाषा
* भारतीय मताधिकार कमेटी की रिपोर्ट, खंडमताधिकार उपसमिति की सिफारिशों पर दिसम्बर 1931 में किया गया था। कमेटी में डॉ. अम्बेडकर सहित 18 सदस्य थे। पार्लियामेन्टरी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फार इंडिया, माक्ेर्वस आफ लोथियन, सी. एच. इस कमेटी के अध्यक्ष थे। - 1 द्वितीय संस्करण, पृष्ठ 202 - 11; भारतीय मताधिकार कमेटी का गठन गोलमेज सम्मेलन की