च. दलित वर्गों संबंधी भारतीय मताधिकार कमेटी - Page 227

210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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संयुक्त प्रांत में दलित वर्ग

  1. संयुक्त प्रांत में दलित वर्ग के लोगों की संख्या के बारे में कमेटी के सामने 5 अलग - अलग आंकलन प्रस्तुत किए गए हैं :

(1) संयुक्त प्रांत की प्रान्तीय मताधिकार कमेटी का आंकलन;

(2) अपने टिप्पण में श्री ब्लंट द्वारा दिया गया आंकलन;

(3) जनगणना आयुक्त द्वारा दिया गया आंकलन; और

(4) संयुक्त प्रांत की सरकार द्वारा दिए गए दो आंकलन।

इन आंकलनों के बारे में मैं यह कहना चाहता हूँ :

  1. मैं मानता हूँ कि श्री ब्लंट के टिप्पण में काफी बल है। उसका आधार वे तथ्य हैं, जो उन्हें उस समय प्राप्त हुए जब 1911 में वह सुयंक्त प्रान्त के जनगणना अधीक्षक थे। उसके साथ गैर - सरकारी हिन्दुओं की एक अनौपचारिक समिति की राय का वजन भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि उसकी नियुक्ति संयुक्त प्रांत की सरकार ने इसलिए की थी कि वह संयुक्त प्रांत में अस्पृश्य जातियों की उन सूचियों की शुद्धता की पड़ताल करे और जिन्हें ब्लंट ने अपने प्रथम प्रारूप में तैयार किया था। फिर भी निम्नलिखित तथ्यों के बारे में श्री ब्लंट से मेरा मतभेद है :

(1) एक तो यह है कि श्री ब्लंट ने निम्नलिखित तीन एकल समुदायों को दो भागों

में विभक्त कर दिया है, अस्पृश्य और स्पृश्य :

स्पृश्य अस्पृश्य

(1) भौक्सा समूह 30,000 19,028

(2) कोरी समूह 1,54,867 7,75,839

(3) चमार समूह 2,000,000 4,187,770

(2) दूसरा मतभेद यह है कि वह 110,032 की संख्या वाले अरख समूह को स्पृश्य

मानते हैं, जब कि तथ्य यह है कि वह समूह पासी समुदाय का अंग है, जो

निश्चय ही एक अस्पृश्य समुदाय है।

मेरा विचार है कि श्री ब्लंट ने जो प्रक्रिया अपनाई है, वह तथ्यों के अनुरूप नहीं है और हिन्दुओं के सामाजिक जीवन के मूल सिद्धान्त से मेल नहीं खाती। कोरी समूह चमार समूह का ही अंग है और इसलिए पूर्णतः अस्पृश्य समूह है। उसकी पुष्टि स्वयं श्री ब्लंट के उन विचारों से होती है, जो उन्होंने 1911 की संयुक्त प्रान्त की जनगणना की अपनी रिपोर्ट में अधीक्षक की हैसियत से व्यक्त किए थे। मैं 1911 की जनगणना रिपोर्ट के पैरा 347 में व्यक्त उनके विचारों को प्रमाण मानता हूँ। वहां उन्होंने कोरी का नाता चमार से होने की चर्चा की है। उसी रिपोर्ट में उन्होंने यह भी कहा है ‘‘कोरी और चमार के बीच के रिश्ते की चर्चा ऊपर की जा चुकी है। गोरखपुर में ऐसा लगता