212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
‘‘इसी प्रकार एक जायसवार चमार कभी भी यह स्वीकार नहीं करेगा कि वह चमार है, बल्कि वह अपनी जाति को केवल जायसवार के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है, जो राजपूत समेत अनेक अन्य जातियों की उपजाति है। एक बार एक साईस ने मेरे साथ ऐसी ही चालाकी करने की कोशिश की और आगरा जिले के टुंडला नगर में मैंने जायसवारों की पूरी बस्ती देखी, जहां पर जांच करने पर पता चला कि वे चमार रेजीमेंट के उन साईसों के वशंज थे, जो वहां आकर बस गये थे।’’
यदि मेरे दावों को स्वीकार कर लिया जाता है और यदि अस्पृश्य जातियों की संख्या के उस भाग को, जिसे श्री ब्लंट ने स्पृश्य मान लिया है, अस्पृश्यों के कुल योग में जोड़ दिया जाता है, तो संयुक्त प्रान्त में अस्पृश्यों के बारे में श्री ब्लंट के आंकड़े 11,476,214 हो जायेंगे।
- जनगणना आयुक्त के आंकलन के अनुसार दलित वर्ग के लोगों की संख्या 1 करोड़ 26 लाख है। यदि कोई और बारीक आकलन किया जाए, तो भी और केवल अस्पृश्यों वाली सूची क को स्वीकार कर लिया जाए, तो इस प्रकार आंकलित दलित वर्ग के लोगों की संख्या 1 करोड़ 10 लाख से कुछ ऊपर ही बैठेगी और वह भी श्री ब्लंट की संख्या के काफी आसपास ही होगी।
संयुक्त प्रांत की सरकार ने दो आकलन दिए हैं। अपनी पहली रिपोर्ट में उसने संख्या 6,773,841 बताई। अपनी अंतिम रिपोर्ट में उसने प्रांतीय कमेटी से सहमति जताई कि स्पर्श से अपवित्रीकरण की परिभाषा के अंतर्गत आने वाली जातियों के लोगों की संख्या 459,000 है। जहां तक पहली रिपोर्ट में दिए गए 6,773,814 के आंकलन का संबंध है, यह बता देना जरूरी है कि यह आंकलन संयुक्त प्रांत में अस्पृश्यों की संख्या का आकलन नहीं है। जहां तक इस मुद्दे का संबंध है, ऐसा लगता है कि संयुक्त प्रांत की सरकार ने श्री ब्लंट के टिप्पण में दिए गए आंकड़े को मौन स्वीकृति दे दी है। संयुक्त प्रांत की सरकार ने 6,773,814 का जो आंकलन दिया है, वह उन लोगों का है जो उनकी राय में राजनीतिक संरक्षण के लिए मान्यता चाहते हैं। इस प्रकार के गुणों एवं दोषों की चर्चा मैंने आगे की है। यहां तो मैं पुनः बस इतना कहना चाहता हूँ कि संयुक्त प्रान्त की सरकार का यह आंकलन वस्तुतः अस्पृश्यों की कुल संख्या का आंकलन नहीं है। अपनी अंतिम रिपोर्ट में संयुक्त प्रांत की सरकार ने जो आकलन दिया है उसके बारे में केवल यह कहना चाहता हूं कि उसके साथ - साथ उस आंकलन को भी देखा जाए, जो उसने साइमन कमीशन को दिया था। उसने सांविधिक आयोग को एक ज्ञापन दिया था। उसके अंत में दलित वर्गों की स्थिति के बारे में उनका टिप्पण परिशिष्ट के रूप में छपा है। उसमें उसने कहा हैः ‘‘प्रांत में हिन्दुओं की कुल आबादी में से कोई एक-तिहाई को यानी कोई 1 करोड़ 30 लाख लोगों को रूढि़वादी हिन्दू अस्पृश्य मानते हैं। इस टिप्पण के साथ संयुक्त प्रांत जनगणना संबंधी 1901 की रिपोर्ट से ली गई अस्पृश्यों के रूप