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दलित वर्गों संबंधी भारतीय मताधिकार कमेटी

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अमीर और गरीब, उन्नत अथवा पिछड़े, शिक्षित अथवा अशिक्षित का और कोई भेदभाव न किया जाए। मेरी राय में यही प्रक्रिया सही प्रक्रिया है। यह कहना आवश्यक नहीं है कि मैं श्री ब्लंट और संयुक्त प्रांत की सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया से सहमत नहीं हूँ।

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  1. 1931 की गणना में दलित वर्गों की संख्या के जो आंकड़े दिए गए हैं, उनके बारे में दो तथ्यों की ओर मैं ध्यान दिलाना चाहता हूँ :

(एक) 1911 की जनगणना के अनुसार स्पर्श द्वारा अपवित्र करने वाले लोगों की

संख्या 2 करोड़ 80 लाख थी, जबकि 1931 की जनगणना में अस्पृश्यों की

संख्या 1 करोड़ 30 लाख दी गई है।

(दो) 1911 की जनगणना में उन 23 जातियों की सूची दी गई है, जिन्हें स्पर्श

द्वारा अपवित्र करने वाला माना जाता है। 1931 की जनगणना में केवल

पंजाब में अस्पृश्य लोगों वाली जातियों का उल्लेख किया गया है।

  1. मैं यह नहीं समझ सका हूँ कि क्या कारण है कि अस्पृश्यों की कुल संख्या और उस श्रेणी में शामिल जातियों की सूची 1911 और 1931 के बीच इतनी ज्यादा क्यों सिकुड़ गई है। लेकिन यह बताना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों से पंजाब के अस्पृश्यों के बीच आद धर्म आन्दोलन नामक एक सशक्त आंदालेन चल रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि वे हिन्दू परिधि से अलग होकर आद धर्मियों के नए नाम से एक अलग जाति के रूप में अपना संगठन बना लें। इस आंदोलन ने इतना जोर पकड़ लिया है कि अस्पृश्यों ने निर्णय किया कि उन्हें 1931 की जनगणना में हिन्दुओं के स्थान पर आद - धर्मी के रूप में दर्ज किया जाए। सरकार ने इस भावना को मान्यता दी और पंजाब के जनगणना अधीक्षक को अनुमति दी कि वह आद - धर्मियों की नयी श्रेणी का अलग कालम बना दें। इसके कारण पंजाब के कुछ भागों में हिन्दुओं और अस्पृश्यों के बीच दंगे हुए। इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ भागों में अस्पृश्यों ने स्वयं को केवल आद - धर्मी के रूप में दर्ज कराया और अपनी - अपनी जातियों का कोई उल्लेख नहीं किया और कुछ अन्य भागों में जहां उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया, उन्होंने स्वयं को अपने जातीय नामों के अधीन ‘हिन्दू’ के रूप में दर्ज कराया। इन तथ्यों का उल्लेख मैं यह दर्शाने के लिए कर रहा हूँ कि अस्पृश्यों की गणना के काम में मुश्किलें पैदा हुईं और इस बात को पंजाब की सरकार ने भी स्वीकार किया है। हो सकता है कि इनके कारण पंजाब में अस्पृश्यों की संख्या और सूची में यह कमी आयी हो। अतः मामले पर सावधानी से विचार करने की जरूरत है।