प्रांतीय कार्यपालिका
17
बन सकती है। इंग्लैंड में भी, जहाँ केबिनेट का दबदबा यथासंभव पूरा - पूरा है, कोई भी प्रधान मंत्री सरकार के अधीन पदों पर नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्ति को नहीं चुनेगा, जो हाऊस ऑफ कामन्स को स्वीकार न हो। बंबई विधान परिषद् इस संदर्भ में भी अशक्त थी। परिणाम यह हुआ कि राजनीतिक पदों पर हमेशा उपलब्ध सर्वोत्तम व्यक्ति नहीं चुने गये। लेकिन मान लीजिए कि परिषद् सुगठित होती और कार्यपालिका पर अपनी इच्छा कारगर ढंग से लागू करती, तो क्या परिणाम होता? क्या इससे दोहरी शासन प्रणाली उत्तरदायी शासन प्रणाली के रूप में कार्य करती? मेरा जवाब है “कदापि नहीं”। क्योंकि कार्यपालिका के विरुद्ध विधायिका के किसी भी कारगर कदम का केवल एक ही परिणाम हो सकता है, और वह है गवर्नर द्वारा निलंबन और प्रमाणन की उन आपातकालीन शक्तियों का उपयोग, जो उसे अधिनियम के अधीन प्राप्त हैं। विधायिका द्वारा सख्त कदम उठाने का यही अनिवार्य परिणाम होता है। इसके प्रमाण वे सब प्रांत हैं, जहाँ संविधान निलंबित कर दिया गया है। लेकिन इसे स्वीकार करने का मतलब यह भी स्वीकार करना है कि ज्योंही परिषद् अपनी शक्तियों का पूरा - पूरा प्रयोग करना शुरू करेगी, दोहरी शासन प्रणाली लड़खड़ाएगी ही, अगर उसे गवर्नर की आपातकालीन शक्तियों का सहारा न मिले। अतः स्पष्ट है कि दोनों सूरतों में दोहरी शासन प्रणाली असफल हो जाती है। यह विधायिका की निष्क्रियता के कारण असफल होती है। जैसा कि बंबई प्रेसिडेंसी में हुआ। यह विधायिका की क्रियाशीलता के कारण असफल होती है, जैसा कि मध्य प्रांतों में हुआ। एक सूरत में विधायिका की कमजोरी के कारण कार्यपालिका को लापरवाही की आजादी मिल जाती है। दूसरी सूरत में विधायिका अपनी क्रियाशीलता से गवर्नर को गैर - जिम्मेदार कार्यपालिका बनाए रखने के लिए मजबूर करती है।
- बहुत से लोगों ने यह सुझाव दिया है कि यदि गवर्नर ने धारा 52(3) के उपबंधों और संयुक्त संसदीय समिति की सलाह के अनुसार संवैधानिक प्रमुख की भूमिका स्वयं निभाई होती, तो दोहरी शासन प्रणाली बेहतर तरीके से चलती। मैं इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं हूँ। पहले तो इस दावे की पुष्टि के लिए तथ्यों का ऐसा कोई आधार नहीं है कि गवर्नर संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाने के लिए बाध्य था। अक्सर यह भुला दिया जाता है कि भले ही दोहरी शासन प्रणाली उत्तरदायी शासन प्रणाली के रूप में चुनी गई थी, जिसका तात्पर्य मंत्रियों के साथ गवर्नर का संबंध संवैधानिक प्रमुख का होना था। लेकिन संयुक्त रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि उसका दर्जा घटाकर वैसा नहीं किया जाना था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “हम नहीं चाहते कि गवर्नर शुरू से ही केवल संवैधानिक गवर्नर की हैसियत से रहे, जो अपने मंत्रियों का निर्णय स्वीकार करने के लिए बाध्य हो। हमने उसके लिए नियंत्रण का अधिकार आरक्षित किया, क्योंकि हम उसे प्रशासन के लिए सामान्यतः उत्तरदायी मानते हैं। संयुक्त संसदीय समिति ने यह सिफारिश भी नहीं की, कि वह संवैधानिक गवर्नर के रूप में कार्य करे। समिति ने अपनी रिपोर्ट के पैरा 5 में स्पष्ट रूप से कहा कि गवर्नर मंत्रियों की सहायता व उनका